भास्कर न्यूज| कोरबा रायपुर से कोरबा या फिर बिलासपुर से कोरबा की यात्रा दिन में करनी है तो यहां आने वाली गाड़ियों के समय स्टेशन पहुंचना ही होगा। अन्यथा दिन में रायपुर से 11 तो बिलासपुर से 9 घंटे तक दूसरी गाड़ी के लिए इंतजार करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं रह जाता है। क्योंकि दोनों ही स्टेशन से सुबह की आखिरी गाड़ी अगर किसी कारण छूट गई तो उनके लिए रायपुर से रायगढ़ रूट पर चलने वाली कुछ गाड़ियांे से कनेक्शन मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है। यह उम्मीद इस स्थिति बढ़ती है क्योंकि ये गाड़ी अपने निर्धारित समय के बजाय विलंब से चल रही होती हैं। इसलिए रायपुर से अंतिम गाड़ी छूट जाने के बिलासपुर में लिंक एक्सप्रेस या फिर चांपा में मेमू लोकल आसानी से मिल जाती है। इसकी संभावना सप्ताह में 4 दिन तक रहती ही है। बावजूद इसके दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर का परिचालन विभाग चाहकर भी विलंब से चलने वाली गाड़ियों को बिलासपुर व चांपा में कनेक्शन देने से बचता है। जिसका खामियाजा यहां के यात्रियों को भुगतना पड़ता है। ज्ञात हो कि लिंक एक्सप्रेस का बिलासपुर से 9.20 व चांपा से 10.21 बजे छूटने का तय समय है। वहीं मेमू लोकल का बिलासपुर से सुबह 9.35 बजे व चांपा से 9.37 बजे निर्धारित समय है छूटने का। सोमवार को इतवारी टाटानगर सुबह 8.15 के स्थान पर 10.33 बजे बिलासपुर तो 9.31 बजे के स्थान पर 11.55 बजे चांपा पहुंची थी। रायपुर से साउथ विहार एक्सप्रेस से अधिकांश यात्री इसलिए आते हैं कि उन्हें कोरबा या चांपा में लिंक एक्सप्रेस या मेमू लोकल का कनेक्शन मिल जाएगा। लेकिन अधिकांश समय रेलवे द्वारा यात्रियों को इस सुविधा से वंचित कर दिया जाता है और वे भटकने परेशान होते हैं। देखा जाता है कि साउथ विहार एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर 1 पर पहुंचती है और प्लेटफार्म नंबर 2 पर खड़ी लिंक एक्सप्रेस को हरी झंडी दे दी जाती है। रेल मामलों के जानकार रामकिशन अग्रवाल का कहना है इस स्थिति में रेलवे को चाहिए कि कोरबा के यात्रियों को कनेक्शन देकर राहत दिया जाए। बिलासपुर से लिंक के बाद मेमू लोकल का सहारा कोरबा आने वाले सुबह के यात्रियों को जिनकी गाड़ी बिलासपुर में विलंब हो जाती है उनके लिए बिलासपुर से सुबह 9.10 बजे छूटने वाली 18518 लिंक एक्सप्रेस व सुबह 9.35 बजे छूटने वाली 68734 मेमू लोकल अंतिम सहारा होती है। क्योंकि इसके बाद बिलासपुर से सीधे शाम को 6.40 बजे कोरबा आने सवारी गाड़ी मिलती है। ऐसे में इन दोनों गाड़ियों के अपने निर्धारित समय पर बिलासपुर या चांपा से रवाना होने व रायगढ़ रूट की जाने वाली ट्रेनों के विलंब से चलने की स्थिति में मदद मिल सकती है। लेकिन रेलवे प्रशासन ऐसा भी नहीं कर पाता है।


