सर्राफा बाजार में बुधवार को ऐसा उतार-चढ़ाव देखने को मिला कि व्यापारी से लेकर ग्राहक तक हर कोई हैरान रह गए। सुबह जहां चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई, वहीं कुछ ही घंटों में कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। सोना भी पीछे नहीं रहा, ऊपरी स्तर छूने के बाद नीचे फिसला और फिर संभला। एक साल के भीतर दोनों धातुओं में ऐतिहासिक तेजी ने बाजार की दिशा ही बदल दी है। बाजार खुलते ही आरटीजीएस में चांदी 3,81,224 रुपए प्रति किलो पहुंची, लेकिन दोपहर तक 3,67,000 पर आ गई। शाम तक फिर 3,78,300 पर स्थिर हुई। यही हाल सोने का भी रहा। हाजिर बाजार में चांदी शाम तक 3,71,282 पर रही। सोना हाजिर में 1,71,097 प्रति दस ग्राम पर कारोबार करता दिखा। पिछले एक साल में इन धातुओं में हुई बढ़ोतरी को देखें तो 1 जनवरी 2025 को जेवराती सोना 74,300 और बिठुर 78,800 था। अब 1.70 लाख के पार है। वहीं चांदी की बात करें तो एक साल पहले चांदी 90,500 थी, अब 3.8 लाख के आसपास पहुंचकर निवेशकों को चौंका रही है। तेजी के पीछे छिपे बड़े कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और शेयर बाजार की अस्थिरता के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में सोना-चांदी की ओर मुड़े हैं। बड़े निवेश फंड भी कीमती धातुओं में होल्डिंग बढ़ा रहे हैं। महंगे दाम के कारण ग्राहक भारी आभूषणों की जगह हल्के डिजाइनों की ओर बढ़ रहे हैं। चांदी महंगी होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और आभूषण उद्योग की लागत बढ़ी है। शादी सीजन वाले परिवार अब सोने की जगह डायमंड और आर्टिफिशियल विकल्प देख रहे हैं। विशेषज्ञ संजय बोथरा के अनुसार, लंबी अवधि में ट्रेंड मजबूत है, लेकिन छोटे निवेशक ऊंचे स्तर पर एकमुश्त खरीद से बचें और चरणबद्ध निवेश करें।


