स्टूडेंट की आत्महत्या या मौत पर पुलिस को सूचना जरूरी:मंत्री परमार बोले- हर कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी, चार महीने में भरें सभी खाली पद

प्रदेश के हर कॉलेज, विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी होगी कि अगर किसी स्टूडेंट की आत्महत्या या उसकी अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी प्रबंधन को मिलेगी तो सबसे पहले पुलिस को सूचना दी जाएगी। इसके साथ ही हर शैक्षणिक संस्था की जिम्मेदारी होगी कि यूजीसी के सभी बाध्यकारी नियमों पर एक्शन लें। विशेषकर एंटी रैगिंग सिस्टम, विद्यार्थियों के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति और छात्र शिकायत निवारण सिस्टम में तेजी से कार्यवाही करना है। इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को चार महीने के भीतर सभी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों को भरने के लिए कहा गया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने इसको लेकर विश्वविद्यालय के कुलगुरुओं के साथ हुई बैठक की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 15 जनवरी 2026 के क्रिमिनल अपील क्रमांक 1425 में पारित आदेश का सख्ती से पालन कराना होगा। इस आदेश में स्पष्ट है कि किसी भी छात्र की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी मिलते ही संबंधित शैक्षणिक संस्थान द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा। चाहे घटना संस्थान परिसर के भीतर हुई हो या बाहर हुई हो। इसके अलावा ऐसी घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एवं संबंधित नियामक संस्थाओं को भी देना आवश्यक होगा। कुलगुरुओं को यह निर्देश भी दिए गए इन मामलों पर भी फोकस करेंगे कुलगुरु कुलगुरुओं को निर्देश दिए गए हैं कि वैश्विक प्रतिभा वापसी योजना का शुभारंभ, सभी राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति करेंगे। अधिक रिक्तियों वाले विश्वविद्यालयों में मिशन मोड में संकाय भर्ती, पाठ्यक्रमों को अपडेट रखने, कौशल एवं अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रमों की शुरुआत के साथ एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने की व्यवस्था लागू किया जाएगा। साथ ही भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना और इसके लिए आशय पत्र जारी किए जाने, उभरती प्रौद्योगिकियों में संकाय प्रशिक्षण, नामांकन वृद्धि, कौशल पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी, नवाचार एवं इन्क्यूबेशन केंद्रों को मजबूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि जैसे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भी कहा गया है। परीक्षा में डिजिटल इवैल्यूएशन अपनाना होगा सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा प्रणाली में डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation) अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। मंत्री ने कुलगुरुओं से कहा है कि अपनी अकादमिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों के लिए SAMARTH डिजिटल प्लेटफॉर्म को प्रभावी रूप से लागू करें। PM-USHA योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालयों को आवंटित राशि का समय-सीमा में उपयोग किया जाए। साथ ही विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, नवाचार, अनुसंधान एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए भी कहा गया। छात्र-शिक्षक अनुपात, परीक्षा सुधार, परिणामों की समयबद्ध घोषणा एवं डिजिटल पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है। ‘विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास प्राथमिकता’ दूसरी ओर प्रदेश के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक गुणवत्ता को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक के लिए स्थायी समिति की बैठक हुई है। मंत्री परमार ने सभी कुलगुरुओं से विश्वविद्यालयों को प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया और विद्यार्थी केंद्रित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर बल दिया। परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों का मुख्य लक्ष्य, विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। इसी दृष्टि से सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियां संचालित की जानी चाहिए। बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने पी-एच.डी. कैलेंडर वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को समय पर समस्त जानकारी उपलब्ध हो सके। साथ ही स्वयं पोर्टल पर अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीयन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे छात्र विभिन्न शैक्षणिक सेवाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें। विश्वविद्यालयों द्वारा महाविद्यालयों से लिए जाने वाले संबद्धता शुल्क पर पुनर्विचार करने, स्वशासी महाविद्यालयों से किसी प्रकार का संबद्धता शुल्क न लेने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शोध केंद्रों की मान्यता के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर न्यूनतम शुल्क निर्धारित करने की अनुशंसा की गई। इसके अतिरिक्त यह भी चर्चा हुई कि जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए माइक्रोबायोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों में शोध केंद्रों संबंधी व्यवस्था बनाई गई है, उसी प्रकार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए भी समान व्यवस्था को मान्यता देने के लिए समन्वय समिति को अनुशंसा की जाये।

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