गुना की ट्रेजरी में 2.70 करोड़ की गड़बड़ी:3.74 करोड़ के स्टाम्प बेचे गए, एंट्री की केवल 1.01 करोड़ की; बाबू पर FIR

जिले के कोषालय में स्टाम्प देने के मामले में करोड़ों की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। कोषालय के बाबू पर ही गड़बड़ी करने का आरोप है। लगभग 2.70 करोड़ की गड़बड़ी के मामले में कैंट थाने में FIR दर्ज की गई है। बाबू पर आरोप है कि 3.74 करोड़ के स्टाम्प जारी किए गए, लेकिन केवल 1.01 करोड़ की ही एंट्री की गई। बाबू पर भ्रष्टाचार अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। कैंट थाने में बुधवार को दर्ज हुई FIR के अनुसार जिले के कोषालय अधिकारी राकेश कुमार ने 21 जनवरी को कैंट थाने को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने का निवेदन किया। इस पत्र में बताया गया कि कोषालय गुना में संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा ग्वालियर द्वारा कोषालय 17 और 18 दिसंबर को निरीक्षण किया गया। इसमें IFMIS रिपोर्ट और भौतिक स्टॉक में अंतर मिला। वरिष्ठ कार्यालय के प्रतिवेदन पर मामले की दूसरी जांच की गई।
इस जांच में सामने आया कि 1.01 करोड़ के चालान की तो एंट्री है, लेकिन 2.70 करोड़ बकाया है। यानि लगभग 3.74 करोड़ के चालान हुए, लेकिन उसमें से सिर्फ 1.04 करोड़ की एंट्री ही की गई।
संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा ग्वालियर द्वारा जाँच प्रतिवेदन में बताया गया कि वर्ष 2018 से 2025 तक की अवधि में चालान भौतिक रूप से इशू किए गए, लेकिन IFMIS में उसकी एंट्री नहीं की गई। इससे राजस्व को हानि होना प्रतीत होता है।
जिला कोषालय में पदस्थ कर्मचारी केशव वर्मा द्वारा प्रस्तुत आवेदन में उनके द्वारा यह स्वीकार किया है कि निरीक्षण के दौरान जो स्टाम्प कम पाये गये हैं, वह उन्होंने बिना कम्यूटर प्रविष्टि एवं कोषालय अधिकारी के संज्ञान में लाये बिना भूल वश दे दिए हैं। उन्होंने यह भी प्रमाणीकरण दिया कि उन स्टाम्पों पर किसी वेंडर द्वारा दावा किया जाता है, तो व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेवार होंगे।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि केशव वर्मा, सहायक ग्रेड-3 (खंजाची) द्वारा वास्तिविक आवश्यकता से ज्यादा मात्रा में शासकीय स्टाम्प दे दिए गए। स्टाम्प वेंडरों को बिना सक्षम अनुमति एवं बिना किसी पावती के स्टाम्प प्रदान किये गये है। IFMIS COMPUTER प्रणाली के निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। ट्रेज़री के डबल लॉक सिस्टम से बिना अनुमति के सिंगल लॉक में लाकर दे दिए गए। बैंक/वेंडर स्टाम्प रसीद सुरक्षित नहीं रखी गई।
कैंट थाने को लिखे पत्र में कहा गया कि प्रथम दृष्टयता यह स्पष्ट है कि शासन को हुई मूल हानि का कारण मप्र कोषालय संहिता 2020 के सहायक नियम 16 से 24 के अनुसार कोषालय से संबंधित अभिलेखों, स्टॉक और संधारित विवरणों का विधिवत संधारण नहीं किया गया। इसके परिणाम स्वरूप शासकीय स्टाम्पों के निर्गमन, चालान प्रविष्टियों और पावती संधारण में गंभीर अनियमितता उत्पन्न हुई, जो काफी समय तक चिन्हित नहीं हो सकी। प्रकरण में गंभीर वित्तीय अनियमित्ता के कारण शासन को हानि हुई, जिसके लिये खंजाची केशव वर्मा उत्तरदायी है। कोषालय अधिकारी की पत्र के बाद कैंट थाने में केशव वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उन पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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