मकराना से अवैध तरीके से ले जाया जा रहे ब्लड पकड़े जाने के बाद यह सामने आया कि इसे सवाईमाधोपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन अधिकारियों की मानें तो इसमें से काफी मात्रा में ब्लड यूपी ले जाया जाने वाला था। ऐसे में ड्रग विभाग सरकार के सामने प्रस्ताव रख सकता है कि राजस्थान से अन्य किसी भी राज्य में ब्लड ले जाने के लिए नियम बनें और उच्च स्तर की अनुमति जरूरी हो। इसके अलावा 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर ब्लड ले जाने के लिए भी नियम होने चाहिए ताकि ब्लड की कालाबाजारी रुक सके। वहीं, ब्लड कैंपों में निजी ब्लड बैंकों को अधिक बुलाया जाने लगा है, जबकि जरूरत सरकारी अस्पतालों को अधिक होती है। कैंप में सुविधाएं देने और ब्लड डोनर्स को लालच देकर निजी ब्लड बैंक गांव से लेकर शहरों तक लगने वाले कैंपों में सेंध लगा रहे हैं। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में ब्लड कैंपों से 1230 यूनिट से अधिक ब्लड निजी ब्लड बैंकों को जा चुका है। इसका नुकसान यह हो रहा है कि सरकारी अस्पतालों में जब ब्लड की जरूरत होती है तो लोगों को मिल नहीं पाता और निजी ब्लड बैंक से खरीदना पड़ता है। वहीं निजी ब्लड बैंकों को दिए जाने वाले ब्लड की सप्लाई में कई बार गड़बड़ी सामने आ चुकी है। ऐसे में जरूरी है कि कैंपों के लिए सरकार और चिकित्सा विभाग मिलकर नए नियम बनाएं और नाको को प्रस्ताव भेज इस पर सहमति लें। विभाग कैंप की अनुमति देता, पर जांच नहीं करता ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित करने के लिए सम्बन्धित व्यक्ति या संस्था को पूर्व में ही ड्रग विभाग से अनुमति लेनी होती है। यानी कि यह जानकारी विभाग के पास होती है कि कहां और कब ब्लड डोनेशन कैंप लगाया जाएगा। लेकिन इसके बावजूद कैंप में ड्रग विभाग की ओर से कोई टीम जांच के लिए नहीं जाती और ना ही यह पता किया जाता है कि लिया गया ब्लड कहां गया है और किस तरह से सप्लाई किया जा रहा है। मकराना में हर डोनर से 600 एमएल तक ब्लड ले लिया गया जबकि 450 एमएल से अधिक नहीं लिया जा सकता था। अब यदि टीम मौके पर गई होती तो इसका पता लगाना आसान होता और निजी ब्लड बैंक को भी डर पैदा होता। दो साल में बढ़ा अवैध धंधा सामने आया है कि पिछले दो साल से राजस्थान से यूपी में काफी ब्लड ले जाया जा रहा है। पिछले डेढ़ साल में चार बार ऐसा ब्लड पकड़ा गया है, जो कि अवैध तरीके से यूपी ले जाया जा रहा था। सामने यह भी आया है कि मकराना से जाने वाला ब्लड भी यूपी ही जाता, लेकिन बीच मे पकड़ा गया। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और चिकित्सा विभाग किसी भी ब्लड को बाहर ले जाने पर रोक लगाए। यदि किसी को जरूरत हो तो उसके लिए विभाग की अनुमति ली जानी जरूरी हो। मॉनिटरिंग बढ़ा रहे
“ब्लड को प्रदेश से बाहर ले जाने के लिए अनुमति होना जरूरी है। निजी ब्लड बैंकों हर कैंप में पहुंच रहे हैं। जरूरी है कि सरकारी अस्पतालों को अधिक बुलाया जाए, ताकि वहां की भी पूर्ति हो सके। हम मॉनिटरिंग बढ़ा रहे हैं।”
-अजय फाटक,ड्रग कंटोलर


