उदयपुर के खेरोदा गांव में जमीन लेन-देन के मामले में एक परिवार का हुक्का-बंद किए जाने को लेकर खाप पंचायत जैसा फरमान सुनाया गया है। पूर्व सरपंच सहित गांव के कुछ लोगों ने मिलकर ऐसा निर्णय ले लिया। जिसमें घोषणा की गई की गांव के मांगीलाल और उसके परिवार के साथ गांव का कोई भी ग्रामीण लेन-देन नहीं रखेगा। उनके साथ बातचीत और मदद नहीं करेगा। ना ही दुकान से उन्हें कोई सामान देगा। अगर ऐसा कोई करता है तो उस पर 51 हजार रुपए का वसूला जाएगा। इस फरमान के बाद गांव में पड़ित परिवार की स्थिति ये हो गई कि बाहर से रिश्तेदार राशन पहुंचा रहे है। गांव से करीब 5 से 7 किमी दूर राशन सहित अन्य चीजें लेने जाना पड़ रहा है। गांव का कोई भी सदस्य बात नहीं कर रहा। इस फरमान को सुनाते हुए का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें पीड़ित परिवार के लिए ऐसा फरमान सुनाया जा रहा है। 3 बिस्वा जमीन को लेकर चल रहा था विवाद
पीड़ित मांगीलाल का आरोप है कि उसके पिता के नाम पर 3 बिस्वा का बाड़ा है। इसको लेकर गांव के ही भैरूलाल व उसके भाई पूर्व सरपंच दिनेश जणवा से विवाद चल रहा है। भैरूलाल और दिनेश का कहना है कि ये जमीन मेरे पूर्वजों ने उन्हें बेच दी थी लेकिन उनके पास इसका कोई डॉक्यूमेंट नहीं है। ऐसे में वे अब मुझ पर इस जमीन की रजिस्ट्री कराने का दबाव बना रहे हैं। इसको लेकर 12 जनवरी को झगड़ा भी हुआ था। मांगीलाल ने बताया कि जब बेची हुई जमीन का उनके पास कोई डॉक्यूमेंट ही नहीं है तो वे किस आधार पर रजिस्ट्री करवाएंगे। पीड़ित बोला: हमारा काम-धंधा बंद हो गया, परिवार कैसे पालें?
पीड़ित मांगीलाल के बेटे ललित सुथार ने बताया कि 25 जनवरी को कुछ लोगों ने मिलकर हमारे खिलाफ ये फैसला सुना दिया। हम इतने दिनों से डर की वजह से किसी से कुछ नहीं बोल पाए थे। फिर हिम्मत करते हुए खेरोदा थाने में बीती शाम को रिपोर्ट दर्ज कराई। ललित ने बताया कि वे फर्नीचर का काम करते हैं लेकिन उनका काम धंधा बंद हो गया है कोई काम नहीं मिल रहा। ऐसे में परिवार को कैसे पालें? हमें गांव से पूरी तरह बेदखल और निष्काषित कर दिया गया है।


