मंडला जिले के ग्रामीण इलाकों में गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही जल संकट गहरा गया है। पानी की समस्या को लेकर लगातार दूसरे दिन ग्रामीणों को सड़क पर उतरना पड़ा। गुरुवार को नैनपुर जनपद पंचायत के कजरवाड़ा ग्राम पंचायत अंतर्गत ग्राम सिमरिया के ग्रामीणों ने नैनपुर-मंडला मुख्य मार्ग पर खाली बर्तनों के साथ धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रशासन को वह गंदा पानी भी दिखाया जिसे वे पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नल जल योजना के तहत पानी की टंकी और पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन बोरिंग में पानी नहीं होने के कारण नलों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। तीन में से दो कुएं धंसे गांव में पहले तीन कुएं थे, जिनसे ग्रामीण अपनी पानी की जरूरतें पूरी करते थे। समय के साथ इनमें से दो कुएं धंस गए हैं। अब केवल एक कुआं बचा है, जिसमें भी पानी का स्तर बेहद नीचे चला गया है। गंभीर जल संकट के कारण ग्रामीणों को पास के एनीकट से पानी भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, एनीकट का पानी गंदा और पीने योग्य नहीं है, लेकिन मजबूरी में वे इसी पानी को उबालकर पी रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और पीएचई विभाग में शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इससे परेशान होकर ग्रामीणों ने गुरुवार को नैनपुर-मंडला मार्ग पर धरना दिया, जिससे सड़क पर आवागमन बाधित हुआ और कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। धरना स्थल पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले भी पहुंचे। उन्होंने पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएचई मंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद ग्रामीण पानी के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने नल-जल योजना को केवल कागजों तक सीमित बताते हुए ग्रामीणों की गंदा पानी पीने की मजबूरी को सरकार की विफलता करार दिया। प्रदर्शन की अन्य तस्वीरें…


