राजधानी जयपुर में पहली बार लंग्स (फेफड़ों) ट्रांसप्लांट कर इतिहास रचा है। एसएमएस हॉस्पिटल में हुए इस ट्रांसप्लांट के बाद अब मरीज की हालत स्थिर बनी हुई है। सीटीवीएस की पूरी टीम मरीज के हर एक-एक मिनट के मूवमेंट पर नजर बना रखी है। ऑपरेशन करने वाली टीम के हैड डॉक्टर राजकुमार यादव ने बताया कि मरीज को अभी आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है और दो-तीन दिन वेंटिलेटर पर ही रखा जाएगा। डॉक्टर यादव ने बताया- ये उत्तर भारत में इतिहास है। उन्होंने बताया कि शायद ही उत्तर भारत में कहीं लंग्स ट्रांसप्लांट किया गया हो। हमने और हमारी टीम ने पूरी मेहनत के साथ काम को पूरा किया। उन्होंने बताया कि मरीज के जो हार्ट और लंग्स लगाए गए है वह वर्क कर रहे है, लेकिन फिर भी हमने अभी पूरी बॉडी को पंप पर रख रखा है। आपको बता दें कि अभी दक्षिण भारत के चेन्नई या दूसरे शहरों में ही लंग्स ट्रांसप्लांट के केस होते है। लेकिन एक ही मरीज के लंग्स और हार्ट (कॉम्बो ट्रांसप्लांट) एकसाथ होने का ये पहला केस है। हर पैरामीटर का मिनट-टू-मिनट एग्जामिन डॉक्टर यादव ने बताया- मरीज के हर पैरामीटर और उस बॉर्ड ऑर्गन के फंक्शन का मिनट-टू-मिनट एग्जामिन कर रहे है। ताकि ये देखा जा सके कि हर फंक्शन का रेस्पॉन्स तो ठीक आ रहा है। यूरिन आउटपुट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल आदि पर नजर बनाए रखे है। दो दिन बाद वेंटिलेटर हटाएंगे डॉक्टर ने बताया- मरीज के सभी अंग अभी वर्क तो कर रहे है, लेकिन फिर भी उसे वेंटिलेटर सपोर्ट (पम्प सपोर्ट) पर रखा है। इसे दो दिन बाद ही हटाया जाएगा। जब तक आश्वास्त नहीं हो जाते कि सभी अंग अच्छे से वर्क कर रहे है और उनके सपोर्ट पर मरीज ठीक रहेगा, तब तक वेंटिलेटर सपोर्ट जारी रहेगा।


