जयपुर के गणगौरी हॉस्पिटल में एक 15 साल की बच्ची के पेट से बड़ी गांठ निकाली गई। डॉक्टरों का कहना है कि अमूमन इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी गांठ बनना चौंकाने वाला है। मरीज को गांठ के कारण चलने-फिरने और सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी, जिसके बाद उसके परिजन उसे लेकर हॉस्पिटल पहुंचे थे, जिसका सफल ऑपरेशन किया गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल, गणगौरी बाजार जयपुर के अधीक्षक डॉ. लीनेश्वर हर्षवर्धन और सीनियर सर्जन डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया- 15 साल की जयपुर निवासी बच्ची 17 जनवरी को हॉस्पिटल की ओपीडी में दिखाने पहुंची। बच्ची का पेट फुलकर इतना बड़ा हो गया था, मानो पेट में कोई बच्चा हो। उसे खाने-पीने के साथ चलने-फिरने और सांस लेने में तकलीफ थी। इसके बाद बच्ची की सोनोग्राफी समेत अन्य जांचे की तो पता चला कि उसके पेट में बड़ी गांठ (35 बाई 28 सेमी.) है। ये गांठ पेलवीस से होकर डायफ्राम तक फैली थी और कुछ जगह आंतों से चिपकी थी। इस ऑपरेशन में डॉक्टर मुकेश शर्मा के साथ डॉ. संजय, डॉ. कमलेश, डॉ. रजत और डॉ. विरेन्द्र भी साथ रहे। बड़ा चीरा न लगाकर 2 छेद से निकाली गांठ डॉक्टर मुकेश शर्मा ने बताया- बच्ची छोटी थी और उसके माता-पिता को चिंता थी कि इस ऑपरेशन के बाद बच्ची के शरीर पर ऑपरेशन का बड़ा चीरा लगाने का निशान दिखने लगेगा, जिससे आगे दिक्कत हो सकती है। लेकिन हमने तमाम जांचें करने और टीम से चर्चा के बाद लोप्रोस्कॉपिक (दूरबीन) के जरिए इसे निकालने का फैसला किया और 21 जनवरी को ऑपरेशन किया। ऑपरेशन करीब ढाई घंटे से भी ज्यादा समय तक चला। उन्होंने बताया केवल 2 छेद (2 से 3 सेमी. के) पूरे पेट पर करके इस दूरबीन को सफलतापूर्वक निकाला गया। उन्होंने बताया- इस ऑपरेशन में दूरबीन से सबसे ज्यादा कठिन काम गांठ को पेट के अंदर आंतों और दूसरे हिस्सों से अलग करना था, जिससे ये चिपकी हुई थी। डॉक्टर ने बताया- बच्ची ऑपरेशन के दूसरे दिन काफी अच्छा महसूस कर रही थी और तीसरे दिन से उसने खाना-पीना शुरू कर दिया। करीब 5 दिन ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद बच्ची को छुट्टी दी गई।


