शहर के आउटर में स्थित देवपुरी, जोरा, बोरियाखुर्द, डुंडा, कचना, आमासिवनी और डुमरतराई इलाके 10 साल पहले नगर निगम की सीमा में शामिल हो चुके हैं, लेकिन यहां की स्थिति अभी भी गांवों जैसी है। ज्यादातर इलाकों में न तो सड़कें बनी हैं न नाली। घरों और सीवरेज का पानी रोड पर बहता है। नल का साफ पानी तक नहीं मिल रहा है। लोग बोर का पानी पीने को मजबूर हैं। इन इलाकों में निगम चुनाव में यही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा भी है। जबकि शहर के बीचोबीच वाले ज्यादातर इलाकों में ये मुद्दे गायब जैसे हैं। इन इलाकों के दौरे से स्पष्ट हो गया कि विकास का फोकस शहर के वार्डों में ज्यादा रहता है। कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड का बोरियाखुर्द 2014 के चुनाव से पहले नगर निगम में शामिल किया गया था। तब यह गांव हुआ करता था। अब ये पूरा इलाका अलग-अलग नामों की कई कालोनियों में तब्दील हो गया है। चारों तरफ आलीशान मकान और दो-तीन मंजिला इमारतें बन गई हैं, लेकिन सड़क नहीं बनी है। ईंट-पत्थर और मिट्टी की उबड़-खाबड़ सड़कें गुजरती हैं। यहां चलना मुश्किल है। सड़क तो बनी पर कच्ची
पुरानी धमतरी रोड पर डुंडा। वार्ड का दर्जा पा चुके इस इलाके में सुविधाओं के नाम पर भीतर कहीं कहीं सड़कें तो बनी है लेकिन कच्ची। बड़े-बड़े मकान बने हैं लेकिन यहां की स्थिति भी गांव जैसी ही है। संकरी गलियां, कच्ची-पक्की सड़कें और गुमटीनुमा दुकानें। बच्चों-युवाओं के लिए लाइब्रेरी जैसी कोई सुविधा नहीं है। 24 घंटे तो दूर 2 टाइम भी थोड़ा-थोड़ा पानी रायपुर उत्तर में कचना, आमासिवनी भी दस साल पहले तक गांव ही थे। अमृत मिशन योजना के तहत इन इलाकों में नगर निगम ने पानी की टंकियां बनवाई है। योजना के तहत 24 घंटे पानी देने की प्लानिंग थी लेकिन अभी बमुश्किल दो वक्त सप्लाई हो पा रही है। वो भी आधा घंटे। इस वजह से पानी का संकट हमेशा रहता है। मोतीलाल नेहरू वार्ड के इन इलाकों में एक गार्डन तक नहीं है। पूरा फोकस शहर के डेढ़ दर्जन वार्डों पर निगम समेत दूसरी सरकारी एजेंसियों का पूरा फोकस शहर के 16-17 वार्डों तक सिमट गया है। जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, एमजी रोड, साइंस कालेज, अवंति विहार, मोतीबाग, सिविल लाइन, राम सागर पारा, जवाहर नगर, समता कालोनी, देवेंद्र नगर इत्यादि इलाकों में ही राज्य शासन की बड़ी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। स्मार्ट सिटी ने इन्हीं क्षेत्रों को एबीडी एरिया में शामिल कर विकास किया। मोतीबाग में आनलाइन रीडिंग के लिए तक्षशिला लाइब्रेरी, साइंस कालेज के सामने 24 घंटे स्टडी की सुविधा के लिए नालंदा परिसर, जयस्तंभ चौक और कलेक्टोरेट के पास दो मल्टीलेवल पार्किंग आदि शहर के भीतरी वार्डों में हैं। शहर के बीचो-बीच वाले तालाब ही संवारे
बूढ़ातालाब, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, कटोरा तालाब सहित शहर के भीतर के छोटे-बड़े तालाबों का ही सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। महाराजबंध, खोखो और बोरिया तालाब में एसटीपी बनाई गई है। चुनावों के पहले शहर के भीतरी इलाकों की सड़कों के डामरीकरण पर ही फोकस रहता है। सड़कों के किनारे पेवर ब्लॉक, डिवाइडरों पर स्मार्ट पोल, सुंदर कलाकृतियां, पेंटिंग्स इत्यादि पर नगर निगम, स्मार्ट सिटी ने लाखों-करोड़ों खर्च शहर के बीच के वार्डों में ही किए हैं।
स्मार्ट सिटी और बिजली कंपनी ने इन इलाकों को बिजली के झूलते तारों से राहत दिलाने के लिए अंडरग्राउंड केबलिंग की है। विधायक मद से भी बड़ा खर्च यहीं होता है।
पानी नहीं इसलिए चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी प्रधानमंत्री आवास योजना दलदल सिवनी के करीब पांच हजार लोगों को सालभर से पीने का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। यहां रहने वाले लोगों ने कलेक्टर, निगम अफसरों से लेकर जोन के अधिकारियों तक ज्ञापन सौंपे हैं। इसके बावजूद समस्या दूर नहीं होने पर लोगों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है। मंगलवार को सभी लोग कालोनी के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन किया। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि नगर निगम ने पीएम आवास तक पानी सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाई थी। इससे कालोनी में पानी आता था। सालभर पहले निगम के अफसरों ने पास की एक प्राइवेट बिल्डर और कालोनी को इसी पाइपलाइन से जोड़कर पानी दे दिया। इससे हमारे पीएम आवास कालोनी में पानी आना कम हो गया। जरूरत का 25 प्रतिशत पानी ही मिल रहा है।


