सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परमानेंट करने की मांग:चंद्रभान सिंह विधानसभा में बोले- इससे गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मिलेगा बल

चित्तौड़गढ़ के निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने आज बुधवार को विधानसभा में NHM में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत संविदा पर काम कर रहे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की मांगों को पूरा करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस दौरान चिकित्सा मंत्री को भी इस बारे में सोचने के लिए आग्रह किया। विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परमानेंट करने पर गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं को बल मिलेगा। अगर परमानेंट नहीं भी हो पाए तो उन्हें अन्य राज्यों की तर्ज पर सैलरी दी जाए। CHO को किया जाए परमानेंट बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल में आक्या ने अपनी मांग रखी। उन्होंने NHM में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत राज्य में संविदा के रूप में काम कर रहे 7000 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की मांगों को पूरा करने की बात रखी। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परमानेंट किया जाना चाहिए ताकि गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं को बल मिल सके। प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का मिड लेवल हेल्थ केयर प्रोवाइडर कैडर का गठन कर उनके पे मैट्रिक्स लेवल (4800 ग्रेड पे) के साथ उन्हें परमानेंट किया जाना चाहिए। इंसेंटिव की राशि को सैलरी में फिक्स किया जाना चाहिए उन्होंने कहा कि CHO पर आए दिन तलवार लटकती रहती है। उन्हें काम करने में भी दिक्कतें आ रही है। अगर उन्हें परमानेंट नहीं भी कर सके तो कम से कम जिस तरह से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड में फिक्स मानदेय है, इस मानदेय को यहां पर भी लागू करना चाहिए। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को 25 हजार रुपए फिक्स मानदेय के अलावा 15 हजार रुपए हर महीने मिलने वाली इंसेंटिव की राशि को अन्य राज्यों की तरह फिक्स सैलरी में शामिल करवा कर एक साथ 40 हजार रुपए करना चाहिए। इंसेंटिव की राशि के लिए होता है भ्रष्टाचार विधायक ने कहा कि इंसेंटिव की राशि को पाने के लिए बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और CHO का शोषण किया जाता है। अगर उनकी सैलरी फिक्स की जाए तो यह शोषण भी काम होगा और भ्रष्टाचार भी काम होगा। सरकार पर भी किसी तरह का अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। उन्होंने इस दौरान चिकित्सा मंत्री से निवेदन किया है कि उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के बारे में सोचना चाहिए। अधिकारियों ने कई बार धरना प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया लेकिन अभी तक उनकी मांगों को लेकर कोई भी विचार नहीं किया गया है।

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