इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर मंगलवार को जल सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। भोपाल के सभी 85 वार्डों में भी 2 घंटे तक जल सुनवाई की जाती है, लेकिन सैंपलिंग के नाम पर छल हो रहा है। वार्डों में मौजूद कर्मचारी केवल 10 मिलीलीटर पानी में 3 बूंद क्लोरीन मिलाकर जांच कर रहे हैं, जबकि आदेश के अनुसार 11 पैमानों पर पानी की जांच करना है। इस बीच नाली के पानी को शुद्ध बताने पर विपक्ष ने शहर सरकार को जमकर घेरा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि वार्डों में न तो पानी का टीडीएस (टोटल डिजॉल्वड सॉलिड्स) और न ही रंग-स्वाद को लेकर कोई जांच हो रही है। कर्मचारी पानी को शुद्ध बताते हुए लोगों को रवाना कर देते हैं। दूसरी ओर शहर के 20 से ज्यादा इलाकों में अभी भी गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। समझा जा सकता है कि नगर निगम प्रशासन पानी को लेकर कितना गंभीर है। इस मंगलवार को जल सुनवाई के रियलिटी चेक में कर्मचारी ने 15 सेकंड में ही नाली के पानी को ही शुद्ध बता दिया था। इसके बाद बुधवार को निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने जिम्मेदार अफसरों को प्रशिक्षित कर्मचारी के जरिए ही जांच करने और लैब में टेस्टिंग के आदेश दिए हैं। उन्होंने भास्कर की खबर के बाद सभी अफसरों से कहा है कि बाकी पैरामीटर पर भी जांच करें, ताकि कहीं गंदा पानी आ रहा है तो सैंपल लेकर जांच हो सके। बॉल्टी में गंदा पानी लेकर पहुंचे, कहा- पानी की जांच करें, गायब हो गए जिम्मेदार
इधर, इस मुद्दे पर गुरुवार को कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। कांग्रेसी सुभाषनगर में चंबल कॉलोनी के उस वार्ड ऑफिस में पहुंचे, जहां नाली के पानी को पीने लायक बताया गया था। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला बॉल्टी में गंदा पानी लेकर वार्ड ऑफिस पहुंचे और टेस्ट कराने की मांग की। इस दौरान जोनल अधिकारी और एई गायब रहे। कांग्रेस नेता शुक्ला ने बताया, चंबल कॉलोनी में आज भी सीवेज नाली के अंदर से गुजर कर वाटर सप्लाई लाइन संचालित की जा रही है। इस लाइन से बेहद गंदा और बदबूदार पानी चंबल कालोनी के घरों में आ रहा है। इस पर मौके पर पहुंचे और नगर निगम वॉटर सप्लाई का हाल देखा। एक बाल्टी में वाटर सप्लाई का गंदा पानी भरकर शुक्ला एवं नागरिकों ने जोनल कार्यालय का घेराव किया। जोनल अधिकारी को गंदा पानी का नमूना देकर तत्काल सुधार करने की मांग की गई है। नागरिकों के विरोध प्रदर्शन और हंगामे की सूचना पहले ही मिल जाने के चलते मौके से जोनल प्रभारी एवं असिस्टेंट इंजीनियर वाटर सप्लाई नदारत हो गए। जिसके कारण उन्हें शिकायत की प्रति नहीं दी जा सकी। शुक्ला ने कहा कि पानी की शुद्धता जांचने के लिए 11 प्रकार की जांच होती है लेकिन वार्ड कार्यालयों में एक प्रकार की क्लोरीन की जांच करके नाली के पानी को पीने योग्य पानी बताया जा रहा है, जो जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। अगर जल्द ही इस कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो भोपाल में भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी घटना घटित हो सकती है। शुक्ला ने कहा, मैंने नगर निगम कमिश्नर को आमंत्रित किया है कि वे अपनी टीम के साथ चंबल आएं और जो यहां कि जनता पानी पी रही है, वह पीकर बताएं। यदि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो दूषित पानी लेकर रहवासियों के साथ नगर निगम कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इस अवसर पर तारिक अली, अहमद खान, शानू खान, दिलशाद खान, फैजान खान, अफरोज आलम आदि मौजूद थे। अब जानिए, 3 जल सुनवाई में क्या हुआ?
भोपाल में पहली जल सुनवाई 13 जनवरी, दूसरी 20 जनवरी और तीसरी 27 जनवरी को हुई। इनमें 2585 जगहों से कुल 6519 सैंपल लिए गए। दावा है कि इन सैंपल की जांच 8 लैब में कराई गई। ज्यादातर में पानी को शुद्ध ही बताया गया। दूसरी ओर वार्ड ऑफिस में सैंपलिंग के नाम पर छल ही हो रहा है, क्योंकि 11 में से सिर्फ 1 की क्लोरीन जांच ही की जा रही है। जबकि भोपाल में 20 से ज्यादा ऐसे इलाके हैं, जहां पर गंदा पानी सप्लाई हो रही है। खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर के ग्राउंड वॉटर के 4 सैंपल फेल हो चुके हैं। यहां के पानी में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिला था। बाद में इस पानी के उपयोग पर रोक लगा दी गई थी। यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा में मिला था। गंदा पानी और निगम का साफ झूठ…ये पढ़िए प्रेम नगर के बुजुर्ग रामचंद्र तिवारी ने बताया कि 8 दिन से गंदा पानी पीने को मजबूर है। नई लाइन अब तक चालू नहीं की है। निगम पुरानी लाइन से ही पानी की सप्लाई कर रहा है। कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। ऐसे तो बीमार हो जाएंगे। ऐशबाग के सैयद अलमास अली ने बताया कि ऐशबाग, जनता क्वार्टर समेत कई इलाकों में गंदे पानी की सप्लाई की जा रही है। इसे लेकर कई बार निगम को जानकारी दे चुके हैं, लेकिन लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। यदि वार्ड में पानी की जांच नहीं तो महापौर हेल्पलाइन पर शिकायत करें
यदि वार्ड में आपके पानी की जांच नहीं की जा रही है तो महापौर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। महापौर हेल्पलाइन का नंबर-155304 है। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की जा रही है। ऐसा करने से जिम्मेदारों को तय समय सीमा में जांच करना पड़ेगी और कोई गड़बड़ी नहीं कर सकेंगे। INC ने कहा- एमपी में नाले के पानी को क्लीन चिट
भोपाल में नाली के पानी को भी शुद्ध बताने की खबर के बाद नेशनल कांग्रेस ने X पर पोस्ट किया। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश में अब नाले के पानी को भी ‘क्लीन चिट’ मिलने लगी है। चौंकिए मत! यही इस सरकार की हकीकत है। सरकारी कर्मचारियों ने टेस्टिंग के नाम पर नाले के पानी को साफ घोषित कर दिया। जिस प्रदेश में गंदा पानी पीने से लोगों की मौत हो चुकी हो, वहां ऐसी आपराधिक लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने X पर लिखा पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने लिखा
भोपाल में नाली का गंदा एवं बदबूदार पानी भी जांच में पीने योग्य घोषित। 15 सेकंड के क्लोरीन टेस्ट से गंदे पानी को क्लीन चिट, ये सिर्फ घोर लापरवाही नहीं, जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ है। इंदौर के भागीरथपुरा में 28 मौतों के बाद भी सरकार नहीं चेती, जल सुनवाई सिर्फ दिखावा बन चुकी है। जब सरकारी रिपोर्ट में पानी पीने साबित हो गया तो मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों पानी पीना चाहिए। क्या ट्रिपल इंजन की सरकार अगली त्रासदी का इंतजार में है? यह खबर भी पढ़ें… नाली के पानी को निगम ने बताया ‘शुद्ध’…पीने लायक! भोपाल में नाली का पानी भी पीने लायक है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि नगर निगम के अमले ने जल सुनवाई के दौरान वाटर टेस्टिंग के बाद इसे माना है। जी हां, नाली के पानी को वार्ड ऑफिस में महज 15 सेकंड में हुए टेस्ट में ‘शुद्ध’ बता दिया गया। इससे समझा जा सकता है कि भोपाल के किसी भी वार्ड में इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हालात कभी भी बन सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…


