मकराना में डोनेट 1600 यूनिट ब्लड गायब?:क्रेटा के साथ क्रूजर में भी तस्करी, हेड कॉन्स्टेबल बोलीं-तस्करों को मैंने पकड़वाया, इनाम में ट्रांसफर मिला

राजस्थान के मकराना (डीडवाना) में लगाए गए दो कैंप में डोनेट किए गए 2821 यूनिट में से 1600 यूनिट ब्लड गायब है। ये खुलासा भास्कर की पड़ताल में हुआ है। 25 जनवरी को पूर्व विधायक रूपाराम मुरावतिया के चचेरे भाई प्रेम प्रकाश की पुण्यतिथि पर लगाए गए कैंप में 2767 यूनिट ब्लड डोनेट हुआ था। परिवार के बयान और प्रेसनोट में भी इस बात का जिक्र था। 26 जनवरी को मौलासर में भी नादिया फाउंडेशन और व्यापार संघ के कैंप में मकराना ब्लड बैंक को 54 यूनिट ब्लड मिला था। यानी दोनों कैंप में 2821 यूनिट (2767+54) ब्लड डोनेट किया गया था। अब नागौर के ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट के एडीसी प्रेम सिंह मीणा का कहना है कि ब्लड बैंक की टीमों ने कैंप से 966 यूनिट ही मिलना रिकॉर्ड में दर्ज किया है। 255 यूनिट ब्लड तस्करी कर ले जाते पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि बाकी बचा 1600 यूनिट ब्लड (2821-966-255) कहां है? क्या आरोपियों ने ये ब्लड पहले ही बेच दिया था? इधर, कार्रवाई के श्रेय को लेकर भी पुलिस महकमे में विवाद छिड़ गया है। एक लेडी कॉन्स्टेबल ने दावा किया है कि तस्कर उसकी मुखबिरी की वजह से पकड़े गए, लेकिन इनाम देने के बजाय उसका ट्रांसफर कर दिया गया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… लैब टेक्नीशियन रात को ब्लड लेकर निकला था क्रेटा से
भास्कर की पड़ताल में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई में ब्लड तस्करी करते ऑन स्पॉट मकराना ब्लड बैंक का लैब टेक्नीशियन जाबिर भी पकड़ा गया है। जांच में सामने आया कि एक दिन पहले जाबिर 25 जनवरी को भी कैंप खत्म होने के बाद देर रात मकराना ब्लड बैंक से ब्लड लेकर उसी क्रेटा कार से सप्लाई देने के लिए जयपुर की तरफ निकला था। हालांकि उस दिन वो पकड़ा नहीं गया था। किसी को कुछ पता नहीं चल पाया था। इसके अलावा जोबनेर (जयपुर) पुलिस से पहले अवैध ब्लड तस्करी को लेकर कुचामन-डीडवाना जिले के नावां एसएचओ नंदलाल जाट को भी सूचना मिल गई थी, लेकिन वो कार्रवाई नहीं कर पाए थे। क्रेटा के साथ एक क्रूजर भी निकली थी तस्करी के लिए
अगले दिन 26 जनवरी की रात में दो अलग-अलग गाड़ियों में सवाई माधोपुर के महादेवी ब्लड बैंक को ब्लड सप्लाई देने जाना था। इसके लिए रात 9 बजे एक क्रेटा कार और एक क्रूजर कार ब्लड बैंक पहुंच गई थी। यहीं पर दोनों कारों में ब्लड लोड किया गया था। ब्लड दोनों कारों में लोड होने के बाद सबसे पहले क्रेटा जयपुर के लिए रवाना हुई। रेकी कर रहे लोग भी दो अलग-अलग कारों में थे। एक कार क्रेटा के पीछे-पीछे रवाना हो गई थी। दूसरी कार क्रूजर का ध्यान रख रही थी। क्रेटा को तो पुलिस ने पकड़ लिया, लेकिन क्रूजर कहां गई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कॉन्स्टेबल बोलीं- तस्करों को मैंने पकड़वाया
इस बीच कुछ दिनों पहले तक मकराना पुलिस थाने में तैनात रही लेडी हेड कॉन्स्टेबल राजकुमारी मीणा ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ब्लड तस्करी की इस कार्रवाई के पीछे उसकी ही सटीक सूचना थी, लेकिन इनाम देने के बजाय उसका तबादला कर दिया गया। भास्कर टीम लेडी कॉन्स्टेबल से मिलने पहुंची। राजकुमारी मीणा ने बताया कि वो लंबे समय तक मकराना थाने में पोस्टेड रही हैं। बीच में उनका ट्रांसफर हो गया था। अभी 7-8 महीने पहले ही उन्हें वापस मकराना थाने में पोस्टिंग मिली थी। इस दौरान उन्होंने यहां नकली घी और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर कई कार्रवाई की। राजकुमारी ने बताया- लंबे टाइम तक यहां रहने से लोकल में भी मेरी अच्छी पकड़ है। इसी दौरान मुझे कुछ लोगों पर संदेह हुआ था कि जो कुछ समय पहले तक साइकिल और बाइक रखने की कंडीशन में नहीं थे, वो अब स्कॉर्पियो मेंटेन कर रहे थे। ऐसे लोग मेरी नजर में थे। यहीं पर मुझे सबसे पहले ब्लड की तस्करी को लेकर क्लू मिल गया था। मकराना हॉस्पिटल में मेरे पति हरिनारायण और मेरे द्वारा एक एंबुलेंस दी गई है। ऐसे में मैंने एंबुलेंस ड्राइवर कानाराम को इस बारे में पता लगाने के लिए कहा। करीब 5-6 महीने पहले ड्राइवर ने कन्फर्म कर दिया कि ये लोग डोनेशन कैंप में आने वाले ब्लड को आगे ऊंचे दामों पर बेचते हैं। मुझे पता था कि बिना एविडेंस अधिकारी मेरी बात नहीं मानेंगे। ऐसे में मैंने तय कर लिया था कि इनको रंगे हाथ ही पकड़वाऊंगी। पति, ड्राइवर ने रखी तस्करों पर नजर
मैंने अपने पति हरदीन कुंकणा, ड्राइवर गजेंद्र सिंह और कुछ सोर्सेज को पड़ताल में लगा दिया था। इस बीच प्रेम प्रकाश मुरावतिया की याद में हो रहे ब्लड डोनेशन कैंप में मेरी भी ड्यूटी लगी हुई थी। मैंने यहां ब्लड भी डोनेट किया था। इसी बीच अगले दिन शाम में मेरे एंबुलेंस ड्राइवर का फोन आया कि आज मकराना ब्लड बैंक से ब्लड सप्लाई के लिए निकलने वाला है। तस्दीक करने के लिए मैंने मेरे पति और कुछ लोगों को वहां भेजा। सूचना सही निकली। मैं मकराना सीओ भवानी सिंह को जानकारी देने वाली ही थी कि तभी मेरे पति हरदीन का मेरे पास दुबारा कॉल आया। उन्होंने बताया कि क्रेटा मकराना से आगे क्रॉस हो गई है। मतलब अब वो हमारे थाना क्षेत्र से बाहर थे। ऐसे में मैंने तत्काल बीजेपी के नेता और जूसरी सरपंच प्रकाश भाकर को कॉल कर इसकी जानकारी दी। उनसे नावां में इस पर कार्रवाई करवाने को कहा। नावां एसएचओ से उनकी बात हुई या नहीं, ये पता चले बिना ही मैंने जोबनेर एसएचओ सुरेश पहाड़िया को भी कई कॉल किए, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। हालांकि बाद में पता चला कि उनका कुछ दिन पहले ही जोबनेर से ट्रांसफर हो गया था। उनकी जगह नए एसएचओ सोहैल खान आ गए थे। इस बीच क्रेटा के पीछे चल रहे मेरे ड्राइवर और सोर्सेज की मेरे पति और प्रकाश भाकर (जूसरी सरपंच और बीजेपी नेता) की टीम के मार्फत एसएचओ सोहैल खान से बात हो गई थी। उन्होंने मौके पर नाकाबंदी कर दी थी। क्रेटा ने नाकाबंदी तोड़कर भागने का प्रयास किया। पुलिस टीम की गाड़ी और क्रेटा के पीछे चल रही हमारी कार ने उन्हें घेर लिया था। इसके बाद पुलिस ने क्रेटा सवार लोगों को गिरफ्तार कर 255 यूनिट ब्लड जब्त कर लिया। हमारे सोर्सेज देवाराम ने ही एसएचओ सोहैल खान को लगातार अपनी लाइव लोकेशन भेजकर इस कार्रवाई में मदद की थी। वो कार्रवाई से पहले तक लगातार उनके टच में भी था। लेडी कॉन्स्टेबल पर लग चुका हनी ट्रैप गैंग चलाने का आरोप
लेडी कॉन्स्टेबल राजकुमारी को कुछ समय पहले नागौर के तत्कालीन एसपी राममूर्ति जोशी ने सस्पेंड भी किया था, तब उन पर आरोप लगे थे कि वो मकराना शहर में हनी ट्रेप गैंग चलाती हैं। इसे लेकर भास्कर ने राजकुमारी से सवाल किया तो उन्होंने बताया- ये सही है कि मुझ पर आरोप लगे थे, लेकिन विभागीय जांच में मुझे पहले ही क्लीन चिट मिल गई है। मैं पूरी तरह से निर्दोष साबित हुई हूं। तब भी मैं पॉलिटिक्स का शिकार हुई थी। अब आज भी इतना बड़े खुलासे की मुखबिरी करने के बाद भी रिवार्ड तो दूर मेरा ट्रांसफर किया जा रहा है। दो गाड़ियों में कर रहे थे क्रेटा और क्रूजर का पीछा
राजकुमारी ने बातचीत में पति हरदीन कुंकणा, सरपंच प्रकाश भाकर, कानाराम, देवाराम, गजेंद्र सिंह (ड्राइवर) और आशु गौरी का जिक्र किया। भास्कर ने सच्चाई जानने के लिए इन लोगों से भी बात की। लेडी कॉन्स्टेबल के पति हरदीन ने बताया- मुझे अपनी पत्नी (राजकुमारी मीणा) से पता चला था कि मकराना में ब्लड तस्करी हो रही है। 25 जनवरी को मुरावतिया परिवार द्वारा कैंप लगाया गया। तभी तस्करी का अंदेशा हो गया था। मैंने इस बात की जानकारी जूसरी सरपंच और बीजेपी नेता प्रकाश भाकर को भी दे दी। सब ने मिलकर तय किया कि दो अलग-अलग गाड़ियों से हमें इसकी पूरी निगरानी करनी है। रेकी में एक गाड़ी आशु गौरी की थी। दूसरी कार की व्यवस्था कर उसमें देवाराम पूनिया और गजेंद्र सिंह को बैठाया गया था। सबसे पहले क्रेटा वहां से निकली। कुछ ही देर में उसने मकराना क्रॉस कर लिया। पीछे गाड़ी में देवाराम और गजेंद्र थे। हमने प्रकाश भाकर की टीम के मेंबर भोमाराम के मार्फत नावां एसएचओ नंदलाल को जानकारी दी। वो कार्रवाई नहीं कर पाए। क्रेटा नावां भी क्रॉस कर गई थी। बलेनो में बैठे देवाराम ने एसएचओ सोहैल खान को अपनी लोकेशन शेयर करते हुए क्रेटा की सटीक जानकारी दी थी। इसके बाद उन्हें पकड़ा गया था। हरदीन ने बताया- आशु गौरी को मकराना ब्लड बैंक के पास क्रूजर की रेकी करने को कहा गया था। अब वो ये बता रहा है कि उसे पता ही नहीं चला और क्रूजर वहां से गायब हो गई। अब सच्चाई क्या है इसका जवाब तो वही दे सकता है। दावा- जोबनेर एसएचओ को भेजी थी लोकेशन
आशु गौरी मकराना में मुस्लिम अक्लियत समाज के सदर भी हैं। ऐसे में हमने उन्हें कॉल किया। उन्होंने बताया- ये सही है कि 26 जनवरी की रात मैं अपनी गाड़ी से क्रूजर और देवाराम और गजेंद्र सिंह बलेनो गाड़ी से क्रेटा की रेकी कर रहे थे। क्रेटा निकली तो मैं भी कुछ दूर तक गाड़ी से उसका पीछा कर रहा था। इसके बाद वापस लौट आया। लौटा तब तक क्रूजर वहां से निकल चुकी थी। इसके बाद हमने इस कार्रवाई में शामिल रहे ड्राइवर गजेंद्र सिंह और देवाराम से भी बात की। उन्होंने हमें जोबनेर एसएचओ सोहैल खान से उस रात हुई बातचीत की डिटेल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए। एसपी बोले- ब्लड तस्करी की कार्रवाई और ट्रांसफर का कोई कनेक्शन नहीं
जोबनेर एसएचओ सोहैल खान से बात की गई। उन्होंने बताया कि अभी तक की जांच में मकराना में लगे कैंप में ब्लड जमा करने को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। ऐसे में हमने इसे लेकर ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट से एक स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। वहीं कार्रवाई की मुखबिरी को लेकर खान ने बताया कि वो इसे रिवील नहीं कर सकते हैं। वहीं नावां एसएचओ नंदलाल जाट ने बताया- ये सही है कि सरपंच प्रकाश भाकर ने मुझे अवैध ब्लड तस्करी कर ले जा रही क्रेटा कार के बारे में बताया था। पहले तो उस दिन में थाने पर नहीं था। दूसरा मुझे लगा कि ये ब्लड कहीं किसी की जान बचाने के लिए अर्जेंसी में तो नहीं जा रहा है। अगर ऐसा हुआ और मैंने इसे रोक लिया तो किसी की जान भी जा सकती है। अंदाजा ही नहीं था कि ब्लड तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है।

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