भास्कर न्यूज | बारगांव गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथावाचक श्रद्धा ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाए। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक किया जा रहा है। वहीं शाम 5 से 6 बजे तक वृंदावन की झांकी का प्रदर्शन किया जा रहा है। कथावाचक आचार्य श्रद्धा ने शुकदेव और राजा परीक्षित संवाद सुनाते हुए बताया कि एक बार परीक्षित महाराज वन में गए, तब उन्हें प्यास लगी। उन्होंने समीक ऋषि से पानी मांगा, लेकिन ऋषि समाधि में होने के कारण पानी नहीं दे सके। राजा ने इसे अपमान समझकर मृत सांप को ऋषि के गले में डाल दिया। यह घटना पास खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को सूचना दी। ऋषि के पुत्र ने शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आएगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा। जब समीक ऋषि को यह ज्ञात हुआ, तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह कार्य उन्होंने कलियुग के प्रभाव में होकर किया। समीक ऋषि ने राजा को यह सूचना दी। परीक्षित महाराज ने अपना राज्य पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा के तट पर निवास किया। वहां अनेक बड़े ऋषि, मुनि और देवता उपस्थित हुए, और अंत में व्यास नंदन शुकदेव पहुंचे। इस अवसर पर सेवा सहकारी समिति बारगांव के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा, राजेन्द्र यादव, सतीश यादव, देवेंद्र वर्मा, गणेश साहू, मुकेश यादव, डॉ. केके वर्मा, यशवंत सोनी, अनिल वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भागवत कथा का महत्व बताया, भक्ति में लीन हुए कथावाचक ने कहा कि जो व्यक्ति रोज भागवत का कम से कम एक श्लोक अर्थ सहित पढ़ता है या घर में कथा कराता है, उसके पितरों को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने वृंदावन की झांकी के माध्यम से बांके बिहारी जी का दर्शन करने का महत्व भी बताया। बांके बिहारी की काले रंग की प्रतिमा में राधा और कृष्ण का मिलाजुला रूप दर्शाया गया है। मंदिर में मूर्ति के सामने पर्दा हर दो मिनट में हिलता है, जिससे भक्त केवल एक क्षण में दर्शन कर सकते हैं। माना जाता है कि प्रतिमा को देखने से भक्त श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो जाते हैं और उनकी आंखों से स्वतः आंसू बहने लगते हैं।


