नगर परिषद क्षेत्र के शहर स्थित महावीर भवन की धर्म सभा में जैन मुनियों ने व्याख्यान किए। श्रावक-श्राविकाओं को सत्मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समूह में रहें तब शब्दों को और एकान्त में विचारों को संभालना है। गुरु हस्ती ने सामायिक को स्वाध्याय से जोड़ा है। ऐसे में कम से कम 15 मिनट सामूहिक आगम स्वाध्याय होना चाहिए। सामायिक प्रार्थना के साथ स्वाध्याय जरूरी है। परिवार सहित जिनवाणी श्रवण का लक्ष्य रखना है। पुरुषार्थ से अशुभ को भी शुभ में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जहां एक है वहां शान्ति है और जहां अनेक है वहां संघर्ष है। अच्छाइयों को सदैव स्वीकार करना है। भगवान महावीर के सिद्धान्त से भौतिक आध्यात्मिक समाधान मिलता है। इस दौरान अविनाश मुनि ने कहा कि धर्म कार्य में प्रमाद नहीं करना है, जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। इस दौरान सामूहिक रूप से भक्ति गीतिका प्रस्तुत की गई। एकासन, आयम्बिल, निवि, उपवास, एकलठाणा तपस्या प्रत्याख्यान हुए। धर्म सभा का संचालन शाखा मन्त्री मुकेश जैन ने किया। शाखा अध्यक्ष हेमेन्द्र जैन ने आगंतुकों का आभार जताया।


