गत साल जिले में पांच के खिलाफ एफआईआर हुई थी, विधानसभा में गूंजा हुक्का बार का मामला

पिछले साल और नए साल के पहले दिन (1 जनवरी को) टोंक जिला पुलिस की स्पेशल टीम की टोंक शहर में अवैध चल रहे हुक्का-बार के खिलाफ की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद शहर को नशे के इस ‘गुबार’ से फिलहाल निजात मिली है, लेकिन स्थानीय पुलिस और प्रशासन के वे कर्मचारी जो नशे के कारोबार को गुपचुप सपोर्ट कर रहे थे, वे आज भी पर्दे के पीछे छिपे हुए हैं। ऐसे का​िर्मकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का मामला गुरुवार को राज्य विधानसभा में भी गूंजा। बजट सत्र के दूसरे दिन निवाई-पीपलू विधायक रामसहाय वर्मा ने तारांकित और पूरक प्रश्न के जरिए टोंक जिले में हुक्का बार-नशे के खिलाफ टोंक पुलिस की कार्रवाई की स्थिति जाननी चाही थी। सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने टोंक पुलिस के लगातार कार्रवाई करने की बात कही तो विधायक ने पूरक प्रश्न उठाया कि इस कारोबार को सपोर्ट कर रहे घर के भेदियों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए। बेढम ने बताया, 284 प्रकरणों में पुलिस ने लिया एक्शन निवाई-पीपलू विधायक रामसहाय वर्मा ने तारांकित प्रश्न लगाकर जानना चाहा था कि वर्ष 2023 से दिसम्बर 2025 तक टोंक जिला पुलिस ने नशे की अवैध बिक्री और हुक्का-बार के खिलाफ क्या कार्रवाई की है? पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने बताया कि टोंक जिला पुलिस ने उपरोक्त समयावधि में कुल 284 प्रकरणों (कोटपा एक्ट सहित) में कार्रवाई की है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हुए हैं। दावा किया गया है कि टोंक क्षेत्र में अभी हुक्का-बार पर पूरी तरह से अंकुश लगा हुआ है। जिले में नशे के सौदागर सक्रिय है। नई पीढ़ी को इसके आगोश में धकेला जा रहा है। जिले में कुछ कार्रवाई हुई है, निवाई क्षेत्र में भी सख्ती बरतकर अभियान के रूप में नशे के अवैध कारोबार की कमर तोड़ने की जरुरत है। नशे के कारोबार को शातिराना तरीके से सपोर्ट कर रहे पुलिस-प्रशासन के का​िर्मकों की भी पहचान कर उन्हें भी बेनकाब किए जाने की जरूरत है। रामसहाय वर्मा, विधायक, निवाई- पीपलू

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