केईएम रोड से फड़ बाजार जाने वाली सड़क का 2.3 फीट चौड़ा 14 फीट लंबा हिस्सा बंद होगा

दो दशक पूर्व केईएम रोड से फड़बाजार की ओर जाने के लिए सिर्फ 4 फीट का रास्ता था। तत्कालीन यूआईटी प्रशासन ने यहां एक बुक सेंटर समेत कुछ दुकानें अवाप्त कीं। सड़क को चौड़ा कर फड़बाजार के लिए रास्ता बनाया। उस समय एक मामला न्यायालय में चल रहा था। न्यायालय ने उस सड़क को बंद कर संब​ंधित भू स्वामी को कब्जा दिलाने के लिए मौका सेल अमीन नियुक्त कर दिया। यूआईटी ने जगह को अवाप्त किया था उस वक्त 2.3 फीट चौड़ी और 14 फीट लंबी चौकी की जगह को हलके में लेकर छोड़ दिया। वही छोटी सी चूक आज बड़ी समस्या के रूप में सामने है। सांखला फाटक से सीधे केईएम रोड चौराहे के सामने से फड़बाजार जाने के लिए सिर्फ 4 फीट चौड़ा रास्ता था। सिर्फ एक मोटर साइकिल ही जा सकती थी। यूआईटी ने 1980 से 1982 के आसपास यहां कुछ दुकानों को अवाप्त किया था। जो हिस्सा अवाप्त किया था वो केईएम रोड से फड़बाजार की ओर मुड़ने पर बाई साइड वाला हिस्सा है। यूआईटी ने यहां अवाप्त की गई दुकानों के बदले कुछ दुकानें डीआरएम आफिस के सामने आवंटित की। कुछ मरुधर नगर में भूखंड आवंटित किए। यूआईटी से चूक रह गई कि एक 2.3 फीट चौड़ी और 14 फीट लंबी चौकी को अवाप्ति हिस्से में शामिल नहीं किया और सड़क चौड़ी कर दी। इसको लेकर भू-स्वामी दुर्गाशंकर पुत्र चंपालाल ने न्यायालय में शरण ली। न्यायालय ने फैसला दुर्गाशंकर के पक्ष में सुनाते हुए यूआईटी को कब्जा ​देने के लिए कहा। यूआईटी ने नहीं सुनी तो हाईकोर्ट में इजराय लगा दी। हाईकोर्ट से इजराय की पालना कराने के आदेश ​हुए। इस आधार पर सेल अमीन नियुक्त किया गया और अब प्रशासन से पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराने के लिए कहा ताकि सड़क बंद कर कब्जा दिलाया जाए। इजराय का तो पालन होगा, रास्ता…पीड़ित पक्ष सरेंडर करे न्यायालय ने उसकी जमीन के कागजात और आधार देखकर ही निर्णय दिया होगा ऐसा मेरा मानना है। पालन नहीं हुआ तो इजराय लगाने के लिए पीड़ित पक्ष भी स्वतंत्र हैं। इजराय की पालना कराना भी कानूनन वैध है। इसलिए अभी इसमें कुछ नहीं हो सकता। मगर ये भी सच है कि जिस रास्ते को बंद किया जाएगा वो शहर का हदय स्थल है। पूरे जिले के लोग यहां बाजार करने आते हैं। इसलिए विकल्प यही है कि पीड़ित पक्ष ही किसी तरह सरेंडर करे। उसके लिए जो भी संबंधित विभाग वो समीक्षा कर उसका उचित मुआवजा दे और कानूनन उस बीच जमीन को अवाप्ति की श्रेणी में ले। उसके बाद पीड़ित पक्ष न्यायालय में ये पक्ष रखेगा कि मैं संतुष्ट हूं और मुझे अब कोई कार्रवाई नहीं करानी। अन्यथा कानून अपने हिसाब से ही नियमों के तहत अपना काम करता रहेगा।

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