आटे के कट्‌टे से मिला हत्यारे का सुराग:मर्डर के बाद मांगी 10 लाख की फिरौती, घरवालों के साथ बच्चे को ढूंढने का नाटक, पार्ट-2

क्राइम फाइल पार्ट–1 में आपने पढ़ा था कि जोधपुर के भीतरी शहर में घर के बाहर खेल रहा 7 साल का बच्चा लापता हो गया। घरवालों के पास 10 लाख रुपए की फिरौती के लिए मैसेज आया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। कई स्थानों पर दबिश दी, लेकिन मासूम का कोई सुराग नहीं लगा। तीन दिन बाद बच्चे की लाश रेंज आईजी के घर के पास एक आटे के कट्‌टे में मिली। अब पढ़िए आगे की कहानी… 7 साल के मासूम की हत्या से पूरा शहर नाराज था। लोगों में पुलिस के खिलाफ गुस्सा था। ऐसे में पुलिस के सामने जल्द केस सॉल्व करने की चुनौती थी। सबसे बड़ा चैलेंज था कि पुलिस के पास एकमात्र सुराग वह आटे का कट्‌टा था, जिसमें मासूम हिमांशु की लाश मिली थी। तत्कालीन डीसीपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने 8 थानों की पुलिस, 3 एसीपी के केस में लगाया। पुलिस तलाश में जुट गई कि वैसे आटे के कट्टे हिमांशु के घर के आस-पास कहां मिल सकते हैं, जिसमें उसकी लाश मिली थी। एक घर पर शक, वहीं से खुला हत्या का राज उस कट्‌टे के सीरियल नंबर के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। तत्कालीन खांडा फलसा थाने के थाना अधिकारी दिनेश लखावत ने हिमांशु के घर के आस–पास तलाशी ली। पास ही के एक घर में रोटियां बनाने का काम चलता था। पुलिस घर में गई तो देखा कि जिस कट्‌टे में हिमांशु की लाश थी, उसी तरह के 25 किलो आटे के कई खाली कट्टे वहां पर मौजूद थे। इस पर पुलिस को यकीन हो गया कि इस घर से ही हत्या का राज खुलेगा। शक के आधार पर पुलिस ने उस घर में रहने वाले किशन सोनी को गिरफ्तार कर लिया। ऑनलाइन जुए में रुपए हारा तो रची साजिश आरोपी पहले तो हिमांशु के अपहरण और हत्या में हाथ होने से इनकार करता रहा, लेकिन बाद में पुलिस की सख्ती के आगे टूट गया। आरोपी किशन ने बताया कि वह ऑनलाइन जुआ खेलता था। इसमें 50 हजार रुपए हार गया था। उसे जल्द से जल्द पैसे चुकाने थे। ऐसे में प्लानिंग में जुट गया कि किस तरह कम टाइम में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है। इसी दौरान हिमांशु खेलता-खेलता आरोपी किशन सोनी के घर जा पहुंचा। उस वक्त किशन घर पर अकेला ही था। माता-पिता व बहन घर पर नहीं थे। हिमांशु जाने लगा तो घोंट दिया गला किशन के घर पर किसी अन्य के नहीं होने से हिमांशु वापस निकलना चाहता था। वहीं किशन बार-बार उसे बातों में उलझाकर रोकता रहा। इसके बाद हिमांशु नहीं रुका तो आरोपी ने उसे जबरन रोकने की कोशिश की। उसका गला दबाना शुरू कर दिया। मासूम की सांसें उखड़ने लगीं। वह चिल्ला भी नहीं पाया। इसके बावजूद भी मासूम का दम नहीं निकला तो आरोपी ने कमरे में रखे एक गमछे को रस्सी बनाकर हिमांशु का गला घोंट डाला। चंद ही सेकंड में मासूम की सांसें थम गईं। हत्या के बाद एक घंटे तक यानी शाम 4:45 बजे तक हत्यारा मासूम के शव के पास बैठा रहा। इसके बाद आटे के खाली कट्टे में ‌शव को डाल दिया, क्योंकि परिवार वालों का घर आने का समय हो चुका था। शव फेंकने के बाद फिरौती के लिए फोन कट्टे को कमरे के नीचे बने अंडरग्राउंड में रखा ताकि परिवार वालों को भी भनक न लगे। शाम पांच बजे आरोपी की मां व बहन घर पहुंचे तब भी वह सामान्य बना रहा। मां और बहन काम में लग गई और वह लाश को ठिकाने लगाने के लिए मोबाइल पर शहर की सुनसान जगह सर्च करने लगा। फिर कट्‌टे को उठाया और साइकिल पर रख कर रातानाडा पोलो ग्राउंड में फेंक कर घर लौट गया। वहां से लौटने के बाद किशन ने सोचा कि अब भी वह हिमांशु के घरवालों से फिरौती के रुपए वसूल सकता है। 10वीं पास हिमांशु को मोबाइल की अच्छी जानकारी थी। उसने एक खास ऐप की मदद से हिमांशु के दादाजी काे फिरौती का मैसेज किया, जिसमें उसके मोबाइल के केवल 4 डिजिट शो हो रहे थे। मां ने देखा था साइकिल पर कट्‌टा ले जाते हुए किशन की उम्र उस समय 22 साल थी। उसके पिता बाईजी तालाब क्षेत्र में रोटी का ठेला लगाते थे। उसकी मां व बहन रोटियां बेलती थी। किशन एसी आदि ठीक करने का काम करता था। लॉकडाउन के समय उसका काम बंद था। वह घर में ही रहता था। अक्सर घर से सामान ले जाकर पिता के ठेले तक पहुंचाने का काम किया करता था। उस दिन भी जब वह आटे के कट्‌टे को साइकिल पर ले जा रहा था तो हिमांशु की मां ने देखा था। उसे लगा कि हर बार की तरह वह उस कट्‌टे में सामान रख कर पिता के ठेले पर जा रहा होगा। बेटे को ढूंढते आरोपी के घर तक पहुंची थी मां हिमांशु की मां संजू प्रजापत ने बताया कि वह बहुत चंचल था। पूरी गली में सबका लाडला था। उस दिन शाम को जब वह गली में खेलता हुआ नजर नहीं आया तो उसकी दादी सुमन प्रजापत ने पूछा भी था। तब पहले उन्होंने कहा यही कहीं खेल रहा होगा। काफी देर बाद भी नहीं लौटा तो संजू ने आस-पास तलाश की और आरोपी के घर का दरवाजा बजाया। इस पर आरोपी ने दरवाजा खोला और पूछा क्या हुआ? संजू ने हिमांशु के बारे में पूछा। आरोपी किशन ने मना कर दिया कि हिमांशु इधर नहीं आया। इसके बाद वो संजू और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ हिमांशु को ढूंढ़ने का नाटक करने लगा। किशन पर कैसे हुआ पुलिस को शक हत्या के बाद खुद को बेगुनाह दिखाने के लिए हत्यारा किशन परिवार के साथ मिलकर हिमांशु को ढूंढने का नाटक करता रहा। जहां भी पुलिस एक्टिव थी, किशन उन सभी जगहों पर मौजूद था। इसके अलावा उसकी आंखें भी सूजी हुई थीं। जिनसे पता चल रहा था कि वो 2-3 दिन से सोया नहीं है। इससे किशन पुलिस के शक के दायरे में आ गया था। वहीं जगह उसके घर से पुलिस को वैसे ही आटे के कट्‌टे मिले तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया। वर्तमान में केस अंडर ट्रायल है। परिवार जल्द से जल्द सजा की मांग कर रहा है। 6 महीने बाद दूसरी जगह रहने लगा परिवार हिमांशु की मौत के 6 महीने बाद ही उसके दादा-दादी व माता-पिता वो घर छोड़ कर वहां से दस किलोमीटर दूर चौखा में आकर रहने लगे। हिमांशु की मां का कहना है कि वह वापस लौट कर उस तरफ नहीं गई। वहां हिमांशु की यादें बसी है। हर जगह वह ही नजर आता है। ऐसा लगता है बाहर गली में वह खेल रहा है। गली में सभी उसे बहुत प्यार करते थे। जब मुझे बताया कि पड़ोसी किशन ने उसकी हत्या की है, तब मुझे यकीन नहीं हुआ। किशन कभी भी सभी के साथ घुलता-मिलता नहीं था। वह सिर्फ अपने काम से काम रखता था। कम बोलता था। पहले तो मुझे लगा कि गलतफहमी हुई है, लेकिन जब पुलिस ने बताया तब लगा आखिर मेरे बेटे से ऐसी क्या दुश्मनी थी? क्यों मार दिया उसे? उसकी बहनें भावना और भुवनेश्वरी हर रोज उसे याद करती है। इनको संभालना मुश्किल हो गया है। हम सभी यही चाहते हैं कि जिस तरह मेरे बेटे को किशन ने हमेशा के लिए मुझ से दूर किया वह भी कभी अपने परिजन से नहीं मिल पाए। उसे जल्द से जल्द सजा हो। चार साल बाद भी इंसाफ का इंतजार हिमांशु के दादा ओमप्रकाश अब भी उस घटना को भूल नहीं पाते। जैसे ही हिमांशु का जिक्र होता है, आंखें नम हो जाती हैं। बोले- मेरा इकलौता पोता था। इस घटना के बाद मोहल्ला छोड़ दिया। मन नहीं लगता वहां। अब तो यही चाहते हैं कि चार साल होने को हैं, आरोपी को सजा होनी चाहिए। बहन भावना का कहना है कि उस समय लॉकडाउन की वजह से स्कूल नहीं जाते थे। वह सिर्फ ट्यूशन जाता था। हमने उस समय बहुत ढूंढने की कोशिश की। हमें नहीं पता था कि पड़ोस में बैठा युवक ही उसकी हत्या कर देगा। हिमांशु हर चीज के लिए दीदी-दीदी करता मेरे पीछे घूमता था।…ये कहते-कहते भावना की आंखें बहने लगी। …… हिमांशु का मर्डर…सीरीज का पहला पार्ट भी पढ़िए… 7 साल के मासूम का मर्डर, बोरे में मिली लाश:आईजी के घर के पास फेंकी थी बॉडी, 5 बहनों का इकलौता भाई था, पार्ट-1

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