प्रदेश में जयपुर के बाद अब उदयपुर नगर निगम के पास दूसरी डिजिटल लाइब्रेरी है। यहां एंट्री से लेकर एग्जिट तक और किताबें इशू व जमा कराने की पूरी प्रक्रिया डिजिटली हो रही है। इसके लिए 18 लाख की लागत से पांच अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। इनमें डिजिटल एंट्री अटेंडेंस रीडर, आरएफआईडी सिक्योरिटी गेट, सेल्फ चेक आउट–इन कियोस्क, बुक ड्रॉप मशीन और आरएफआईडी हैंड हेल्ड रीडर शामिल हैं। ये मशीनें विद्यार्थियों की आवक-जावक की अटेंडेंस, किताबें इशू-जमा करने, रैकों में किताबें तलाशने और बिना इशू कराए किताब बाहर ले जाने पर अलर्ट देने का काम करती हैं। लाइब्रेरी का उद्घाटन साल 2022 में हुआ था, लेकिन मशीनें उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे डिजिटल रूप में शुरू नहीं किया जा सका। करीब तीन माह पहले सभी मशीनें लाइब्रेरी पहुंचीं। लगभग 1 माह तक सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन के बाद नवंबर में शुरू किया गया। अभी रोजाना 50 से 60 छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन के लिए आ रहे हैं, जबकि इसके 500 सदस्य हैं। लाइब्रेरी के भूतल पर 50 और प्रथम तल पर 100 पाठकों के बैठने की क्षमता है। सदस्य बनने के लिए 5 रुपए का फॉर्म शुल्क निर्धारित है। मशीनों की खासियत… बिना इशू किताब बाहर ले जाने पर अलर्ट देता है आरएफआईडी सिक्योरिटी गेट बिना इशू किताब बाहर ले जाने पर अलर्ट देता है और इसमें लगे हाई रेजोल्यूशन कैमरे एक सेकंड में 6–7 फोटो कैप्चर करते हैं। सेल्फ चेक आउट–इन कियोस्क से सदस्य सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक किताबें स्वयं इशू और जमा कर सकता है। बुक ड्रॉप मशीन से 24 घंटे किताबें जमा की जा सकती हैं, जिसे सुरक्षा व्यवस्था के बाद बाहर लगाया जाएगा। आरएफआईडी हैंड हेल्ड रीडर रैकों में किताबें खोजने में मदद करता है और पास आने पर बीप अलर्ट देता है। लाइब्रेरी में 8 से 10 करोड़ ई-बुक्स ऑनलाइन और 40 हजार से अधिक फिजिकल किताबें उपलब्ध हैं। सभी पुस्तकों पर एंटी-थेफ्ट स्टीकर और लाइब्रेरी की पहचान अंकित है। डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन के लिए पुस्तकालय अध्यक्ष भगवत सिंह राव, एक ऑपरेटर, एक फायरकर्मी, एक यूडीसी, एक एलडीसी और दो सहायक कर्मचारी नियुक्त हैं।


