शाजापुर में डाक विभाग के जरिए कई मंत्रियों, राज्यपाल, संघ पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों को चार पेज की गुमनाम चिट्ठी मिली। इस चिट्ठी में भाजपा विधायक अरुण भीमावद पर मनी लॉन्ड्रिंग, भूमाफिया, मेडिकल माफिया से गठजोड़ और सफेदपोश गुंडे पालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र सामने आने के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। गुमनाम पत्र के लेखक ने खुद को परेशान नागरिक, ठेकेदार, वकील, कॉलोनाइजर और मेडिकल कर्मी बताया है। पत्र में आठ अध्यायों में आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। पत्र में विधायक पर प्लॉट रिश्वत लेने का आरोप लगाया पहले अध्याय में कुछ कॉलोनाइजर्स का नाम लेते हुए विधायक को उनका पार्टनर बताया गया है और प्रति प्लॉट रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि इन आरोपों के चलते प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती। दूसरे अध्याय में सरकारी अस्पताल के कुछ डॉक्टरों पर निजी अस्पतालों में मरीज रेफर करने और कमीशन लेने का आरोप है। तीसरे अध्याय में ठेकेदारों से न्यूनतम 10 प्रतिशत कमीशन लेने और सिटी फोरलेन निर्माण में कमीशन डील का उल्लेख किया गया है। चौथे अध्याय में विधायक पर 5 से 7 सफेदपोश गुंडे पालने और उनसे वसूली कराने का आरोप लगाया गया है। पर्यावरण और काले धन को लेकर हस्तक्षेप की मांग की पांचवें अध्याय में मंदिरों के जीर्णोद्धार और दुकान निर्माण के नाम पर बंदरबांट कर धर्म के नाटकीकरण का आरोप है। छठे अध्याय में चीलर डेम और चीलर नदी में गंदगी, अतिक्रमण और लापरवाही का मुद्दा उठाया गया है। सातवें अध्याय में रिश्तेदारों के जरिए शैल कंपनियां बनाकर काले धन को सफेद करने का आरोप लगाया गया है। आठवें और अंतिम अध्याय में संघ और जागरूक नागरिकों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। विधायक बोले- छवि धूमिल करने की कोशिश इस चिट्ठी के सामने आने के बाद भाजपा से जुड़े लोगों ने इसे विधायक की छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। वहीं,पुलिस ने भी डाकघर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे मामले पर विधायक अरुण भीमावद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनका और उनके परिवार का चरित्र जनता के सामने है और वे वर्षों से सामाजिक व शैक्षणिक क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं।


