सीहोर में किसानों ने फसल बीमा मुआवजे की मांग की:ओलावृष्टि से खराब हुई फसल में दूसरे दिन भी प्रदर्शन

सीहोर जिले के ग्राम पीलूखेड़ी में किसानों ने ओलावृष्टि से खराब हुई गेहूं और चने की फसल के बीमा मुआवजे की मांग को लेकर दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में प्रभावित किसानों ने खराब हुई गेहूं की फसल के बीच धरना दिया और नारेबाजी की। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से शीघ्र ग्राम पीलूखेड़ी में सर्वे कराकर आरबीसी 64 के तहत राहत राशि और बीमा राशि देने की मांग की। इस मौके पर हनुमत सिंह मेवाडा, बद्री प्रसाद, ब्रह्म सिंह, शिवनारायण मीणा, राजमल सेन, प्रेम सिंह मेवाडा, प्रहलाद सिंह, रामदयाल और हेमराज मीणा सहित कई किसान मौजूद थे। अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने इन क्षेत्रों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कहीं तेज हवा के कारण गेहूं की फसल खेतों में आड़ी पड़ गई है, तो कहीं ओलावृष्टि से बालियां टूटकर जमीन पर बिखर गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा से किसान गहरे संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कई गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो चुकी है। ऐसे में आरबीसी 64 के अंतर्गत राहत राशि और फसल बीमा का लाभ किसानों को शीघ्र दिया जाना चाहिए। मेवाड़ा ने यह भी बताया कि इससे पहले भी प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की सोयाबीन की फसल बर्बाद हुई थी, लेकिन आज तक न तो पूरा मुआवजा मिला और न ही बीमा राशि। किसानों को मात्र 5000 रुपये प्रति किसान की सहायता दी गई थी, जो नुकसान की तुलना में अपर्याप्त थी। जबकि किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों से नियमित रूप से बीमा प्रीमियम काटा जाता है, उसकी राशि भी किसानों को नहीं मिल पाई। पीलूखेड़ी के किसान हनुमत सिंह की स्थिति इस आपदा की भयावहता को दर्शाती है। उनके पास 8 एकड़ भूमि है, जिसमें पूरी तरह गेहूं की फसल लगी थी और वह अब पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

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