भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल में जहां एक ओर बस्तर में नक्सली आतंक लगभग समाप्ति की ओर है। वहीं दूसरी ओर घने जंगलों में बसे ग्रामीणों के लिए विकास का रास्ता खोला जा रहा है। नक्सल इलाके में सड़कें तेजी से बन रही हैं। 41 सड़कों का काम पूरा कर लिया गया है। मेंटेनेंस के लिए सड़कों की सेटेलाइट से निगरानी होगी। इनमें दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण में 2006-07 में बननी शुरू हुई सड़क को बनाया गया। नक्सलियों की वजह से ये सड़क 19 साल से अधूरी थी। इसके बनने से बच्चे स्कूल आसानी से जा रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को अपने विभाग के साल की उपलब्धियों का ब्योरा पेश किया। शर्मा ने बताया कि कटेकल्याण की सड़क अधूरी होने से करीब आधा दर्जन गांव के लोग सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। सुकमा के कोंटा जिले में करीब दो किमी की सड़क 5 साल से अटकी थी। सड़क के अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना भी लाेगों तक पहुंचायी जा रही है। सबको आवास देने के लक्ष्य और माेदी की गारंटी पूरा करने पहली कैबिनेट में ही 18.12 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई है। 2011 एवं 2018 की सर्वे सूची के 26. 95 लाख हितग्राहियों को केंद्र से स्वीकृति दी जा चुकी है। इसमें साढ़े सत्रह लाख मकान पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 47 हजार अधूरे मकानों को भी मंजूरी दी गई है। नक्सली दल छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले तीन हजार चार सौ आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को भी आवास दिलाया जाएगा। स्व-सहायता समूहों की संख्या 2.82 लाख
सड़कें टूटफूट तो नहीं रही, सेटेलाइट से होगी निगरानी {ग्रामीण अजीविका मिशन बिहान में रेडियो कार्यक्रम दीदी के गोठ शुरू किया गया। {स्व-सहायता समूहों की संख्या दो लाख 74 हजार से बढ़कर दो लाख 82 हजार पहुंची। {साढ़े बारह हजार महिलाओं को 141 करोड़ की सहायता स्वीकृत की प्रदेश में 10 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य {सरगुजा में देश पहला ग्रामीण गारबेज कैफे शुरू किया {दंतेवाड़ा छिंदनार में कबाड़ के जुगाड़ से गार्डन बनाया {जी राम जी योजना में 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन काम की गारंटी। बस्तर- सरगुजा में बिछेगा सड़कों का जाल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांव-गांव में रोड कनेक्टिविटी बढ़ाने फेस-4 शुरू कर दिया गया है। इसके तहत इस बार करीब 22 करोड़ की सड़कें बनाई जाएंगी। इसके लिए ऑनलाइन टेंडर भरने का शुक्रवार को अंतिम दिन है। इस बार ग्रामीण सड़क योजना का फोकस बस्तर और नक्सल प्रभावित अन्य जिले हैं जहां आजादी के बाद से अब तक सड़कें नहीं पहुंची हैं। सड़कें बनने से बिजली, शिक्षा और चिकित्सा की सुविधा ग्रामीणों तक आसानी से पहुंचेगी। इस वजह बस्तर और अन्य आदिवासी इलाकों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। शुक्रवार को ऑनलाइन टेंडर जमा होगा और सड़क बनाने की प्रक्रिया कागजों में शुरू हो जाएगी। अगले महीने के अंत तक सभी टेंडर तय कर दिए जाएंगे। पता चला है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस-4 में करीब 774 सड़कों का चयन किया गया है। बस्तर में अभी 208 सड़कें अधूरी हैं। उन्हें भी पूरा किया जाएगा। विभागीय स्तर पर उन सड़कों का सर्वे कराया गया। सर्वे रिपोर्ट में जहां बेहद जरूरी माना गया वहां सड़कों का चयन किया गया। इस बार डामर की सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। माना जा रहा है कि प्लास्टिक के मिश्रण से बनी सड़कें 6 से 7 साल तक टिकाऊ साबित हो सकती है जबकि विशुद्ध डामर वाली सड़कें 4-5 साल की अवधि तक ही सुरक्षित मानी जाती है। स्वच्छ भारत मिशन की स्वच्छताग्रही दीदियों से प्राप्त वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग सड़कों में करने की प्लानिंग है। अब तक तीन अलग-अलग जगहों पर प्लास्टिक के उपयोग वाली सड़कें बनायी जा चुकी हैं। ये प्रयोग सफल साबित हो रहा है।


