गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती गुरुवार को हिंदू राष्ट्र अभियान के तहत राजनांदगांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रयागराज माघ मेले से जुड़े हालिया विवाद सहित कई समसामयिक विषयों पर अपनी राय रखी। बढ़ते धर्मांतरण के मामलों पर शंकराचार्य ने हिंदू समाज को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण रोकने के लिए समाज को स्वयं आगे आना होगा। सक्षम हिंदुओं को आगे आकर कमजोर और गरीब हिंदू परिवारों की आर्थिक सहायता करनी चाहिए। शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि अगर समाज का हर व्यक्ति एक-एक रुपया दान करे, तो किसी भी हिंदू को लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता। उन्होंने माघ मेले विवाद पर कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तामझाम के कारण रोका गया था।
प्रयागराज विवाद पर रखी स्थिति स्पष्ट इसके अलावा शंकराचार्य निश्चलानंद ने प्रयागराज माघ मेले से जुड़े हालिया विवाद सहित कई समसामयिक विषयों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि प्रयागराज मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नहीं रोका था। उनके साथ मौजूद अत्यधिक तामझाम और अव्यवस्था के कारण प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कदम उठाया था। इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षा और सुव्यवस्था बनाए रखना था। किसी भी संत के स्नान पर रोक नहीं लगाई गई थी। मुख्यमंत्री योगी पर आरोपों पर टिप्पणी से इनकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लगाए गए आरोपों को लेकर सवाल पूछे जाने पर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने किसी भी प्रकार की सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अब जानिए कि मौनी अमावस्या के स्नान के वक्त क्या हुआ था… 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। इसके बाद से वह संगम के तट पर धरना दे रहे थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए-


