अस्पतालों की सुस्ती, जनता पर भारी:जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी हुई तो अब जेब होगी और ढीली, हास्पिटल्स को जारी किए लेटर, समय पर सूचना नहीं दी तो सख्त कार्रवाई

शहर के निजी अस्पतालों की लापरवाही अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाली है। जन्म और मृत्यु की घटनाओं का समय पर रजिस्ट्रेशन न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ नगर परिषद सख्त हो गई है। नगर परिषद आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि यदि 21 दिन के भीतर पोर्टल पर सूचना दर्ज नहीं की गई, तो भारी जुर्माना वसूला जाएगा। 50 रुपये की जगह अब देना होगा 1000 तक जुर्माना नियमों में हुए हालिया संशोधन ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। पहले जन्म-मृत्यु पंजीकरण में देरी होने पर मात्र 50 रुपये की पेनल्टी लगती थी, जिसे अब बढ़ाकर न्यूनतम 250 रुपये और अधिकतम 1000 रुपये कर दिया गया है। अक्सर देखा गया है कि अस्पताल प्रबंधन जन्म या मृत्यु की सूचना ‘पहचान पोर्टल’ पर अपलोड करने में हफ्तों लगा देते हैं। जब आम आदमी प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचता है, तो उसे पता चलता है कि अस्पताल ने डेटा ही फीड नहीं किया। समय सीमा (21 दिन) निकलने के बाद पोर्टल पर लेट फीस ऑटोमैटिक जुड़ जाती है, जिसका भुगतान मजबूरन आम नागरिक को करना पड़ता है। नगर परिषद की सख्त चेतावनी: “हॉस्पिटल होंगे जिम्मेदार” नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचलिया सभी निजी हॉस्पिटल्स को पत्र जारी कर स्पष्ट कहा गया है कि जिन निजी चिकित्सा संस्थानों को आईडी और पासवर्ड आवंटित किए जा चुके हैं, वे पाबंद हैं कि हर घटना को निर्धारित समय में दर्ज करें। अस्पतालों द्वारा की जा रही देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि सूचना समय पर पोर्टल पर नहीं चढ़ाई गई, तो संबंधित अस्पताल के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आर्थिक नुकसान से बचाव: यदि आपका बच्चा किसी निजी अस्पताल में हुआ है या किसी परिजन की मृत्यु अस्पताल में हुई है, तो तुरंत सुनिश्चित करें कि अस्पताल ने पोर्टल पर एंट्री कर दी है। दस्तावेजों में देरी: देरी होने पर न केवल जुर्माना बढ़ता है, बल्कि आगे चलकर स्कूल एडमिशन, बीमा क्लेम और संपत्ति हस्तांतरण जैसे कार्यों में भी बाधा आती है। जवाबदेही तय : अब आप अस्पताल प्रशासन से सवाल कर सकते हैं कि उन्होंने 21 दिन के भीतर सूचना क्यों नहीं भेजी।

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