स्नातक की डिग्री लेने वाले नियमित व स्वयंपाठी विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप की अनिवार्यता खत्म हो गई है। विद्यार्थी अब प्रोजेक्ट का भी चयन कर सकते हैं। जिसमें समसामयिक विषय, कौशल विकास व सामाजिक सरोकार विषय पर विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट तैयार करने होंगे। इसके लिए कॉलेज प्रशासन भी अपने मानवीय व भौतिक संसाधनों के आधार पर औचित्यपूर्ण विषयों का आवंटन कर सकेगा। इसके लिए शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने दिशा निर्देश जारी किए है। शेखावाटी िवश्वविद्यालय ने स्तनक स्तर (बीए, बीएससी व बीकॉम) के विद्यार्थियों के लिए इस बार पहली बार इंटर्नशिप की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की थी। जिससे विद्यार्थी पढ़ाई की डिग्री के साथ व्यावसायिक अनुभव भी अनिवार्य हो गया था। विद्यार्थियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सरकारी या निजी संगठन, गैर सरकारी संगठन, उद्योग, अनुसंधान प्रयोगशाला में 4 से 12 हफ्तों में इंटर्नशिप को पूरा करना था। इसके क्रेडिट सीधे डिग्री में शामिल होंगे। विश्वविद्यालय ने इंटर्नशिप के साथ प्रोजेक्ट व सेमिनार का विकल्प भी प्रदान किया है। विकल्पों की उपलब्धता : स्नातक पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थी इंटर्नशिप या प्रोजेक्ट में से किसी एक का चयन कर सकेंगे। विषयों में विविधता : प्रोजेक्ट के विषय मुख्य पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहेंगे। विद्यार्थी समसामयिक विषयों, कौशल विकास व सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर अपना प्रोजेक्ट तैयार कर सकते हैं। स्वयंपाठी विद्यार्थी को जमा करवाने होंगे 300 रुपए : मोरारका पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह न्यौला ने बताया कि शेखावाटी विश्वविद्यालय के निर्णय से विद्यार्थियों को न केवल विषय चयन में आसानी होगी, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास का भी अवसर मिलेगा। प्रोजेक्ट कार्य परीक्षा कलेक्शन सेंटर पर पेश करना होगा। इसके लिए स्वयंपाठी विद्यार्थियों को 300 रुपए का शुल्क जमा करवाना अनिवार्य है।


