चंबल नदी में घड़ियालों की आबादी को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुरैना स्थित देवरी घड़ियाल केंद्र में पाले गए 20 घड़ियालों को चंबल नदी के पाली घाट पर छोड़ा गया। इन घड़ियालों में 12 नर और 8 मादा घड़ियाल शामिल हैं, जिनकी उम्र लगभग तीन वर्ष है। गुरुवार को अभयारण्य के अधीक्षक वाय.एस. पारदे की उपस्थिति में घड़ियालों को सुरक्षित तरीके से अलग-अलग बक्सों में रखकर पाली घाट तक लाया गया, जहां उन्हें एक-एक कर नदी में छोड़ा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ये घड़ियाल शुरुआती एक से डेढ़ महीने तक नदी किनारे रहेंगे, उसके बाद धीरे-धीरे गहरे पानी की ओर बढ़ जाएंगे। देवरी घड़ियाल केंद्र घड़ियालों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां चंबल नदी के किनारे की रेत से मादा घड़ियालों द्वारा दिए गए अंडों को एकत्र किया जाता है। इन अंडों की हैचिंग केंद्र में विशेष देखरेख में की जाती है। बच्चों के पर्याप्त विकसित होने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास चंबल नदी में छोड़ दिया जाता है। यह प्रयास घड़ियालों की संख्या को बढ़ाने और इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में मददगार साबित हो रहा है। हालांकि घड़ियाल के बच्चों को चंबल में रिलीज करने के दौरान पिछले वर्षों में भी टांसमीटर लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक मुरैना जिले की सीमा में ही रिलीज किए जाने वाले घड़ियाल के बच्चों के टांसमीटर लगते थे और अब ये पहली बार है, जब श्योपुर जिले की सीमा में छोड़े जा रहे 20 बच्चों में ट्रांसमीटर लगाए गए हैं।


