दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत आने वाले सालों में सबसे अधिक संभावनाओं वाली अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। इस स्थिति को बनाए रखना वित्त मंत्री के लिए आगामी बजट में एक बड़ी चुनौती साबित होगा। एक देश के तौर पर भारत को जो रणनीतिक और आर्थिक बढ़त मिली है, वह आने वाली नीतियों के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती है। एमएस फिन कैप के एमडी मुकुंद मोदी ने बताया- यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और अमेरिका के साथ ट्रेड डील न हो पाने का असर देश की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। जहां EU के साथ FTA से MSME सेक्टर (विशेष रूप से टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, लेदर और इंजीनियरिंग गुड्स) में लंबे समय में बड़े अवसर बनेंगे। वहीं, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ तात्कालिक चुनौती बनकर सामने आए हैं। ऐसे में बजट के माध्यम से क्रेडिट गारंटी स्कीम के जरिए MSMEs को तुरंत राहत दी जानी चाहिए, ताकि वे टैरिफ के प्रभाव को संतुलित कर सकें और आने वाले वर्षों के लिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकें। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच GDP ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा। इसके लिए सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, बिजली वितरण और जल आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर निरंतर निवेश जरूरी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए बिजली क्षेत्र को पहले से कहीं अधिक प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। मौजूदा समय अर्थव्यवस्था के लिए खास है। एक ओर वैश्विक स्तर पर डिस-इन्फ्लेशनरी माहौल बना हुआ है, वहीं FY26 के लिए भारत की ग्रोथ रेट 7.40% रहने का अनुमान है, जो पहले के 6.80% के अनुमान से अधिक है। इसके साथ ही बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) कई वर्षों के निचले स्तर 2.20% पर पहुंच चुका है। यह सुरक्षित तरीके से क्रेडिट विस्तार करने और बाजार की गहराई बढ़ाने का उपयुक्त समय है।


