कोटपूतली में सरसों की फसल पर पाले का खतरा:कृषि विशेषज्ञ ने बचाव के उपाय बताए, रात के समय खेत में धुआं करने की सलह

कोटपूतली में पिछले एक सप्ताह से पड़ रही कड़ाके की सर्दी ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। इस कड़ाके की ठंड के कारण किसानों को अपनी फसलों, विशेषकर सरसों पर पाला पड़ने से नुकसान का डर सता रहा है। कृषि उपनिदेशक डॉ. लाल यादव ने पाले से बचाव के उपाय बताए हैं। दिन में गलन और रात में ठिठुरन से क्षेत्र में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यह स्थिति फसलों के लिए चिंताजनक बनी हुई है। रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक पाले का असर कृषि उपनिदेशक डॉ. लाल यादव ने बताया- फसलों पर पाला विशेष रूप से रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच पड़ता है। यह वह समय होता है जब तापमान सबसे कम होता है। कृषि उपनिदेशक ने बताए उपाए उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि पाला पड़ने का पूर्वानुमान होने पर खेत की उत्तरी दिशा में सूखी घास-फूस, सूखी टहनियां या पुआल आदि को अर्धरात्रि में आग लगाकर धुआं करें। धुआं करने से खेत में गर्मी बनी रहती है और फसलों के पौधों के चारों ओर तापमान में अत्यधिक गिरावट नहीं आती है, जिससे पाले से बचाव संभव होता है।

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