झारखंड में नगर निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण देने के लिए पिछले दो महीने से ट्रिपल टेस्ट सर्वे चल रहा है। अधिकतर जिलों में काम पूरा हो गया है। सर्वे रिपोर्ट संबंधित नगर निकाय में प्रकाशित करते हुए लोगों से आपत्ति मांगी गई है। लेकिन जब लोग सूची देखने पहुंचे तो कई लोगों का नाम गायब था। इसके बाद लोगों ने सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिया। इस शिकायत के बाद भास्कर ने पड़ताल की। दो दिन में 30 बीएलओ से बात की तो सर्वे की सच्चाई सामने आई। 30 में से 25 बीएलओ ने कहा कि सर्वे के लिए घर-घर जाना संभव नहीं था। कम समय में एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर उसकी जाति स्पष्ट करना मुश्किल था। इसलिए वोटर लिस्ट में दर्ज टाइटल के आधार पर जाति का पता लगाया और सर्वे फॉर्म में भर दिया। वोटर लिस्ट के अनुसार करीब 50 फीसदी वोटरों को फोन कर जाति पूछी। 10-15 फीसदी वोटरों के घर पर जाकर जानकारी ली गई। कुछ सर्वेयर ने कहा कि उन्होंने फोन पर उन्ही लोगों से बातचीत की, जो घर पर नहीं मिले। -शेष पेज 8 पर भास्कर स्टिंग : तीन जिलों के बीएलओ से बातचीत से जानिए… कैसे हुआ सर्वे रांची : सर्वे में शामिल बीएलओ रिपोर्टर : मैडम, ओबीसी सर्वे चल रहा है या पूरा हो गया? बीएलओ: हमलोगों ने कुछ दिन पहले ही सर्वे करके रिपोर्ट जमा कर दी है। रिपोर्टर : हमारे घर पर तो अभी तक कोई सर्वे करने नहीं आया, फिर कैसे सर्वे हुआ? बीएलओ: भैया, आपको फोन गया था या नहीं, अधिकतर सर्वे फोन से ही हुआ है। रिपोर्टर : किसी ने फोन भी नहीं किया है? बीएलओ: फोन गया ही होगा, आप घर में किसी से पूछिए। रिपोर्टर : मैडम, सर्वे कैसे होना था, क्या निर्देश था? बीएलओ: वोटर लिस्ट के अनुसार सर्वे हुआ है। वोटर लिस्ट में टाइटल के अनुसार वोटर को फोन करके जाति पूछी गई, उसी आधार पर सर्वे हुआ। रिपोर्टर : आदेश डोर टू डोर सर्वे का था? ऐसा क्यों हुआ। बीएलओ: इतना कम समय में सर्वे करना था कि घर-घर जाकर सभी की जाति पूछना संभव ही नहीं था। इसलिए वोटरों को फोन करके जाति पूछी गई। धनबाद : सर्वे में शामिल बीएलओ रिपोर्टर: मैडम, ओबीसी सर्वे चल रहा है या पूरा हो गया? बीएलओ: हमलोगों ने तो बहुत पहले सर्वे कर लिया था। 10 दिन में ही सर्वे करके रिपोर्ट भी सौंप दी थी। रिपोर्टर: सर्वे डोर टू डोर जाकर किए या कैसे कर लिए? बीएलओ: देखिए, सभी वोटर का आधार नंबर, पता और फोन नंबर हमलोगों के पास है। हमलोगों ने सभी को फोन किया आैर जाति पूछी। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्टर: सभी बीएलओ को घर-घर जाकर सर्वे करना था न? बीएलओ: इतना कम समय मिला था कि घर-घर जाकर सर्वे करना संभव नहीं था। इसलिए सभी बीएलआे ने फोन पर ही सर्वे कर लिया। रिपोर्टर: यह तो गलत हो जाएगा, हमारे ही घर पर अभी तक कोई नहीं आया, फोन भी नहीं आया? बीएलओ: गलत तो नहीं होगा, क्योंकि हमलोग अपने क्षेत्र के सभी वोटरों को जानते हैं। आपके घर में किसी को जरूर फोन आया होगा। अधिकतर लोगों को न फोन आया, न ही कोई घर पहुंचा पहाड़ी टोला के सतीश कुमार ने बताया कि वे ओबीसी हैं, लेकिन किसी ने फोन करके जाति नहीं पूछी। घर पर भी सर्वे करने कोई नहीं पहुंचा। इसी तरह रातू रोड निवासी मंजू देवी ने भी कहा कि न तो कोई उनके घर आया और न किसी ने फोन किया। 20 से से सिर्फ दो लोगों ने कहा कि उन्हें फोन किया था। आयोग में अध्यक्ष नहीं, सर्वे की सत्यता की जांच भी नहीं : राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है। ऐसे में जिलों में हो रहे सर्वे की सत्यता की जांच भी नहीं हो रही है। आयोग के सदस्यों ने बताया कि सभी जिलों से सर्वे रिपोर्ट आ जाएगी उसके बाद कमेटी संबंधित क्षेत्रों में जाकर रैंडम जांच करेगी। जमशेदपुर : सर्वे में शामिल बीएलओ रिपोर्टर: मैडम, ओबीसी सर्वे पूरा हो गया है क्या? बीएलओ : हां, पूरा हो गया है। रिपोर्टर: हमारे घर पर तो कोई सर्वे करने पहुंचा ही नहीं? बीएलओ: फोन पर जानकारी ली गई होगी। सभी के घर जाना संभव नहीं था, काफी कम समय मिला था। रिपोर्टर: आपने कैसे जाना कि वोटर किस जाति का है? बीएलओ: सभी बीएलआे के पास उनके क्षेत्र के मतदाताओं की पूरी सूची है। उनका फोन नंबर भी है, इसलिए फोन करके जाति पूछी गई। रिपोर्टर: टाइटल के आधारर पर जाति तय तो नहीं होती? बीएलओ: सभी वोटरों का टाइटल दिया हुआ है। एसटी-एससी तो क्लियर हो जाता है। आेबीसी वालों का भी स्पष्ट रहता है, सभी को फोन किया गया है। रिपोर्टर: जब डोर टू डोर सर्वे करना था तो फोन पर क्यों? बीएलओ: हमलोगों को जो लिस्ट मिली, उसमें किसी एक का घर सूची में सबसे ऊपर है तो उसके बगल वाले का घर सबसे नीचे। ऐसे में घर जाना संभव नहीं था।


