पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने सेल्फोस (एल्यूमिनियम फॉस्फाइड) जहर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह जहर देश में सबसे घातक जहरों में गिना जाता है। पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में पहली बार यह साबित हुआ है कि इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन नामक थेरेपी इस जानलेवा जहर में मरीजों की जान बचाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इस रिसर्च को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में जगह मिली है, जिससे उत्तर भारत की गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर किए गए इस काम को पहचान मिली है। मरीजों के लिए हुआ फायदेमंद साबित यह रिसर्च पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन विभाग में की गई। रिसर्च का गाडिंयस आफ हैड डिपार्टमेंट” और डीन संजय जैन ने किया। आपात स्थिति में इलाज का उनका अनुभव गंभीर हालत में आए मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ। इस रिसर्च को पीजीआई की मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेल (MERC) से आर्थिक सहायता मिली, जिससे साफ होता है कि संस्थान मरीजों से जुड़ी और समाज के लिए उपयोगी रिसर्च को बढ़ावा दे रहा है। रैंडमाइज्ड क्लिनिकल स्टडी का नेतृत्व इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मंदीप सिंह भाटिया ने किया। इस रिसर्च में डॉ. सौरभ चंद्रभान शारदा को- रिसर्च रहे, जबकि विभाग के अन्य डॉक्टर भी इस अध्ययन में शामिल रहे। मौत की दर घटी मरीजों की हालत में सुधार इस काम के नतीजे बहुत अच्छे रहे। जिन मरीजों को सामान्य इलाज के साथ इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन दिया गया, उनमें मौत का खतरा काफी कम हो गया। इसके साथ ही गंभीर एसिडिटी, ब्लड प्रेशर और हार्ट की समस्याओं में तेजी से सुधार देखा गया। रिसर्च में यह भी पता चला कि अगर यह इलाज जल्दी दिया जाए, तो मरीज की हालत जल्दी और बेहतर होती है। इस इलाज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन सस्ती है और देश के अधिकांश अस्पतालों में पहले से उपलब्ध रहती है। जिला अस्पतालों और छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में भी यह आसानी से मिल जाती है।
कम लागत और आसान उपलब्धता के कारण यह थेरेपी ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी जान बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है, जहां सेल्फोस जहर के मामले ज्यादा सामने आते हैं और उन्नत इलाज की सुविधाएं सीमित होती हैं। उत्तर भारत में गंभीर समस्या सेल्फोस जहर एल्यूमिनियम फॉस्फाइड जहर उत्तर भारत के लिए एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए इसके व्यापक इस्तेमाल के कारण इस जहर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं।
ऐसे में एक प्रभावी, सस्ता और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित इलाज का सामने आना इन राज्यों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह रिसर्च फिर से साबित करता है कि पीजीआई स्थानीय बीमारियों और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करता है। किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को सीधे फायदा पहुंचाने वाले इस तरह के शोध के जरिए पीजीआई देश में मरीजों पर ध्यान देने वाली रिसर्च और मेडिकल नवाचार में अपनी अहम भूमिका बनाए रख रहा है।


