भास्कर न्यूज | अमृतसर तहसील कॉम्प्लेक्स में अवैध चैंबर का हिस्सा तोड़े जाने के बाद आप पार्टी के एक विधायक की दखल से जिला प्रशासन-निगम अफसरों को बैकफुट पर आना पड़ा। बीते 4 फरवरी को डीसी साक्षी साहनी के निर्देश पर तहसील कॉम्प्लेक्स में सरकारी रास्ता कवर कर बनाए जा रहे अवैध चैंबर का हिस्सा निगम टीम ने गिरा दिया था। तहसील कम ड्यूटी मैजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया था कि कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन अगले दिन चैंबर के अवैध हिस्सा तोड़ने के लिए निगम की टीम पहुंची तो विधायक सीधे मौके पर पहुंच गए। जिसके बाद अवैध कब्जा हटाने की बजाए टीमें बैरंग वापस लौट गई। जिस तरह की घटना सामने आई इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेता सहानुभूति हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जब तहसील जैसे जगह में एक-दो फीट जगह पर अवैध कब्जा करवाने से बाज नहीं आ रहे तो शहर में क्या सुधार कराएंगे इसका अनुमान लगाया जा सकता है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि आप सरकार में अवैध कब्जे छुड़वाने-भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे किए जा रहे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ हटकर है। फिलहाल, अवैध चैंबर तोड़कर अफसरों ने वाहवाही तो लूटी लेकिन अब खानापूर्ति साबित हुई। उधर चर्चा बनी हुआ है कि जब एक विधायक के सामने आने से अफसर बैकफुट पर हो गए तो आम लोगों को क्या इंसाफ दिलाएंगे। अपने चहेतों को अवैध कब्जा करवाते रहेंगे। एक्शन के नाम पर दिखावा होता रहेगा। तहसील कॉम्प्लेक्स में रजिस्ट्री दफ्तर के एंट्री गेट की दूसरी साइड जाते रास्ते में चैंबर बनाया जा रहा था, जिसका अंदरखाते लोगों ने विरोध किया लेकिन चैंबर बनवाने वाले के पिता डीएसपी होने की जानकारी पर सामने नहीं आ सके। हालांकि डीसी के पास मामला पहुंचा तो गिराने के आदेश दिए। 4 फरवरी को निगम की टीमें पहुंची और रात 8 बजे तक कार्रवाई चलती रही। तब जिला प्रशासन-पुलिस अफसर आमने-सामने थे। लेकिन अब विधायक की एंट्री भी इसमें हो गई है। जो कि दोनों पर भारी पड़ गए। फिलहाल, इस घटना से आप सरकार की किरकिरी भी हो रही है। लोगों में चर्चा बनी हुआ कि जो विधायक खुद को सबसे बड़ा ईमानदार बताता है, वही अवैध कब्जों को बढ़ावा कैसे दे सकता है। इस दौरान विधायक का दोहरा चेहरा भी देखने को मिला। तहसील में दीवार खड़ी करके चैंबर बनाने वाले के सपोर्ट में आ गए, चूंकि डीएसपी से जुड़ा मामला था। लेकिन उसके पास ही टाइप राइटर का टीन शेड तोड़ दिया गया, उसके हक में कोई नहीं उतरा। मानो इस सरकार में आम लोगों के लिए अलग कानून बना दिया गया हो। रसूखदारों से जुड़ा मामला होने के कारण अब अफसरों ने भी चुप्पी साध ली है। विधायक ने अफसरों को कहा कि प्रशासन ने चैंबर तोड़ने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया था। जबकि इल्लीगल तरीके से रातों-रात या घंटों में कोई कब्जा सरकारी जगह पर किया जाए तो कोई नोटिस देना नहीं बनता। यदि मंजूरी लेकर निर्माण कराया जा रहा तो नोटिस देकर कार्रवाई की जाती है। इस तरह का काम कराने के लिए डीसी के पास आवेदन या मंजूरी लेना जरूरी है। जिस तरह से अवैध चैंबर बनाया, सरकारी रास्ते पर कब्जा करने व डीसी के आदेशों का उल्लंघन मामले में पुलिस कार्रवाई बनती है। लेकिन डीएसपी के बाद अब विधायक की एंट्री के बाद राजनीति शुरू हो गई है।


