एक देश-एक टैक्स सिस्टम से कारोबारियों को राहत दे सरकार

आम आदमी और उद्योग जगत दोनों को केंद्रीय बजट 2026 से राहत की उम्मीद है। महंगाई, बढ़ते खर्च और बदलते वैश्विक हालात के बीच लोग चाहते हैं कि सरकार ऐसे फैसले ले, जिससे उनकी जेब पर बोझ कम हो और उद्योगों को आगे बढ़ने का मौका मिले। एसोसिएशन ऑफ ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्रलिस्ट अंडरटेकिंग के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने आशा जताई कि प्रधानमंत्री इस अवसर पर विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस और सहयोगी पैकेज घोषित करेंगे, क्योंकि जीएसटी में किए गए बदलावों, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद एमएसएमई सेक्टर बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। कच्चे माल की लागत बढ़ने, निर्यात प्रभावित होने और बाजार में मांग घटने से छोटे और मध्यम उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है। ऐसे समय में उद्योगों को सरकार के मजबूत सहयोग की सख्त जरूरत है। एमएसएमई को समझें कारोबारी हरीश केरपाल ने कहा, यदि सरकार एमएसएमई और उद्योगों की वास्तविक समस्याओं को समझकर ठोस फैसले लेती है, तो इससे न केवल लुधियाना बल्कि पूरे देश के औद्योगिक क्षेत्र को नई मजबूती और गति मिल सकती है। उम्मीद है, बजट 2026 में ऐसी नीतियां सामने आएंगी, जो कारोबार को फिर से रफ्तार देंगी। जीएसटी रिफंड ऑनलाइन हो फास्टर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रधान नरेंद्र भमरा ने कहा कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था में सारा बोझ मिडिल क्लास और छोटे कारोबारियों पर है, जबकि बड़े कॉरपोरेट सेक्टर को लगातार सहूलियतें दी जा रही हैं। उनका कहना है कि टैक्स सिस्टम सभी के लिए एक जैसा और समान होना चाहिए, ताकि किसी एक वर्ग पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। हालांकि आम जनता और छोटे उद्योगों की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि जीएसटी रिफंड पूरी तरह ऑनलाइन होना चाहिए और अधिकतम सात दिनों के भीतर खातों में पहुंच जाना चाहिए। जीएसटी दरों में बदलाव हो एम के गुप्ता ने बताया कि उद्योग जगत का मानना है कि बजट 2026 में टैक्स प्रणाली को सरल बनाना, जीएसटी दरों में तर्कसंगत बदलाव, सस्ता और आसान कर्ज, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। खासकर एमएसएमई सेक्टर के लिए राहत पैकेज, ब्याज सब्सिडी और तकनीकी उन्नयन के लिए प्रोत्साहन की जरूरत है। उद्योग भी चाहता है कि बजट में टैक्स स्लैब बढ़ाए जाएं, कर दरें कम हों और अनुपालन प्रक्रिया आसान बने। फेसलेस सिस्टम, कम नोटिस और सरल नियमों से उद्योगों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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