जवद्दी टकसाल में रबाब और तबले की जुगलबंदी सुन मंत्रमुग्ध हुए भक्त

भास्कर न्यूज |लुधियाना रबाब वादक उस्ताद होमयून साखी और तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने जवद्दी टकसाल में अपनी अद्भुत प्रस्तुति से गुरमत संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। लगभग दो घंटे तक चली इस विशेष महफिल में रबाब और तबला की मधुर जुगलबंदी ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। दोनों कलाकारों ने अपने वादन के माध्यम से सुर, ताल और लय का प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उस्ताद होमयून साखी ने रबाब पर संतूर शैली में वादन कर एक अनोखी और दुर्लभ प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर संगीत प्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए। उस्ताद अकरम खान के तबले की संगत ने रबाब की मधुरता को और ऊंचाई प्रदान की। दोनों महान संगीत गुरुओं ने जवद्दी टकसाल के विद्यार्थियों को रबाब और तबला की बारीकियों से भी अवगत कराया। उन्होंने अपने निजी अनुभवों और अमूल्य ज्ञान को सरल शब्दों में साझा किया, जिससे विद्यार्थियों को सीखने की नई प्रेरणा मिली। इस अवसर पर दोनों कलाकारों ने कहा कि परम संत बाबा सुचा सिंह, जो सचखंड के निवासी थे और उनके उत्तराधिकारी संत ज्ञानी अमीर सिंह सिख पंथ की महान विभूतियों में से हैं। उन्होंने कहा कि बाबा सुचा सिंह ने भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए जवद्दी टकसाल की स्थापना की, जिससे सिख समाज को विद्वान कथावाचक और महान कीर्तनकार मिले। सीमित संसाधनों के बावजूद संत ज्ञानी अमीर सिंह द्वारा किए जा रहे कार्य अत्यंत सराहनीय हैं। मंच संचालन ज्ञानी परमिंदर सिंह फगवाड़ा ने कुशलता से किया।

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