लुधियाना| 17 फरवरी से 8वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। लेकिन, विद्यार्थियों की पढ़ाई की चिंता करने की बजाय सरकार ने कंप्यूटर अध्यापकों की ड्यूटियां ‘मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना’ के कार्ड बनाने पर लगा दी है। सरकार की इस कार्यप्रणाली का कंप्यूटर अध्यापकों ने कड़ा विरोध जताया है।कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन के पदाधिकारी कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन पंजाब के सूबा प्रधान प्रदीप कुमार मलूका, जसपाल फतेहगढ़ साहिब, लखविंदर सिंह फिरोजपुर, परमवीर सिंह पम्मी, पवन शर्मा जालंधर, हरचरण सिंह, जतिंदर सिंह सोढ़ी और सुशील अन्गुराल ने बताया कि जब भी कोई डाटा एंट्री का काम होता है तो पंजाब सरकार के अधिकारियों को कंप्यूटर अध्यापकों की याद आ जाती है। लेकिन जब उनकी जायज मांगों की बात आती है, जिसके लिए वह 2 दशकों से संघर्ष कर रहे हैं। तो मंत्री और अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। अब जब मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना के कार्ड बनाने की बात आई है, तो कंप्यूटर अध्यापकों को इस काम में लगा दिया गया है। जबकि महज दो हफ्ते बाद बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं।कंप्यूटर अध्यापकों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब जब पंजाब सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने की बरी आई तो तुरंत कंप्यूटर अध्यापकों को बुला लिया गया है। लेकिन वे पिछले 20 सालों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने सरकार से मांग की है कि 2011 में जारी रेगुलर ऑर्डर में दर्ज सभी लाभ बहाल किए जाएं और उन्हें छठे वेतन आयोग के अनुसार पूरा वेतन व लाभ दिया जाए।


