भास्कर न्यूज|लोहरदगा सुदूरवर्ती क्षेत्र पेशरार का कई इलाका अब भी विकास का बांट जोह रहा है। सुदूरवर्ती पेशरार प्रखंड अंतर्गत तुरियाडीह गांव स्थित नदी पर आज तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह नदी केवल तुरियाडीह ही नहीं, बल्कि पेशरार प्रखंड के जवाल, चुरूवे, बालाडीह, केनार, मुंगो, दुंदरू, हेसाग, चपाल, सनई, जुड़नी, आम तोतरो, बीड़नी, गम्हरिया, बतरू, इस्कीम डांड़ू सहित अन्य गांवों के लिए प्रमुख आवागमन मार्ग है। इसी रास्ते से ग्रामीण रानीगंज बाजार, प्रखंड मुख्यालय और जिला समाहरणालय तक पहुंचते हैं। नदी पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को प्रतिदिन जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ता है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इन सभी गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है और लोग कई दिनों तक घरों में ही फंसे रहते हैं। मरीज, गर्भवती महिलाएं, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। आपात स्थिति में लोग पगडंडी, बांस या लकड़ी के सहारे नदी पार करने को मजबूर होते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर यात्रा करना हमेशा खतरे से खाली नहीं रहता। कई बार वाहन नदी में फंस चुके हैं और बड़ी दुर्घटना होते-होते बची है। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन को लगातार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। गर्मी और ठंड के मौसम में जब नदी सूखी रहती है, तब लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं, लेकिन वर्षा काल आते ही भय और असुरक्षा की स्थिति बन जाती है। एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि इस समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई, इलाज, खेती-बाड़ी और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है, इसके बावजूद लोग विवश होकर जोखिम उठाते हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में ऊपर तुरियाडीह नदी पर पुल निर्माण कार्य शुरू किया गया था। ग्रामीण विकास विभाग, लोहरदगा द्वारा निविदा के माध्यम से 1 करोड़ 39 लाख 43 हजार रुपए की लागत से तीन स्पैन वाले पुल का निर्माण कराया जा रहा था। निर्माण कार्य में लगी पोकलेन मशीन को भाकपा (माओवादी) नक्सली संगठन द्वारा आग के हवाले कर दिए जाने के बाद कार्य पूरी तरह ठप हो गया। घटना के बाद न तो पुल निर्माण दोबारा शुरू हो सका और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई। पुल बन जाने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक कार्यों में राहत मिलती, लेकिन आज स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी और आज भी हालात वही बने हुए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पुल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। मामले पर डीडीसी दिलीप सिंह शेखावत से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में है। विभाग को इसको लेकर रिपोर्ट भी किया गया है। जैसे ही फंड मिलता है आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


