भास्कर न्यूज|गुमला माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर वनवासी कल्याण केंद्र के तत्वावधान में आयोजित होने वाली वार्षिक रोहतासगढ़ तीर्थ यात्रा के लिए इस वर्ष भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। गुमला के वाल्मीकि आश्रम से शनिवार सुबह 9 बजे 20वें रोहतासगढ़ दर्शन के लिए 250 लोगों का एक जत्था पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ रवाना हुआ। यात्रा को सफेद झंडा दिखाकर रवाना करते हुए कार्यक्रम के संयोजक व मूली पड़हा के कोटवार देवेन्द्र लाल उरांव ने सभी दर्शनार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तीर्थ यात्रा का मुख्य उद्देश्य अपने पूर्वजों के पावन स्थलों को नमन करना और अपनी प्राचीन आदि सभ्यता व संस्कृति को जीवंत रखना है। जब हम अपने इतिहास को याद करते हैं, तभी हम आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बना सकते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत सौंप सकते हैं। वनवासी कल्याण केंद्र के जिला समिति अध्यक्ष विशु सोरेंग ने कहा कि रोहतासगढ़ का इतिहास गौरवशाली रहा है। यहां उरांव और खेरवार राजाओं ने लंबे समय तक शासन किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस यात्रा के माध्यम से हमें अपने उस स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज को सशक्त बनाना चाहिए। इस यात्रा में समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही। रवानगी के समय प्रमुख रूप से उपस्थित रहने वालों में खेदू नायक (विभाग संगठन मंत्री, वनवासी कल्याण केंद्र), बिरजू नगेसिया (पड़हा परामर्शदात्री सदस्य), राजबेल उरांव, सोमेश्वर भगत, राजू उरांव, हरिशंकर उरांव, विमलराम भगत, गौरी किण्डो, सोनी कुमारी, मनीषा कुमारी, अमर दीप उरांव, सच्चिदानंद उरांव, विनिता इंदवार उपस्थित थे।


