हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की की अभिरक्षा से जुड़े मामले में उसे पिता के सुपुर्द करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि परिस्थितियां देखते हुए लड़की के सर्वोत्तम हित में कस्टडी पिता को देना उचित है। न्यायमूर्ति विनीतकुमार माथुर एवं न्यायमूर्ति चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने आदेश में उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता पिता ने लगातार पुलिस प्रशासन को जानकारी दी थी कि नाबालिग लड़की निजी प्रतिवादियों की अवैध हिरासत में है। इसके पर्याप्त सुराग और प्रमाण भी उपलब्ध कराए थे। इसके बावजूद पुलिस अफसरों ने समय रहते आवश्यक व प्रभावी कदम नहीं उठाए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शिवसिंह बड़गूजर ने अदालत में तर्क दिया कि पुलिस की उदासीनता के कारण नाबालिग गंभीर खतरे में है। उसके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ। खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक नागौर और थाना प्रभारी थांवला को निर्देश दिया है कि वे विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करें कि पर्याप्त प्रमाण मौजूद होने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अगली तारीख पर पुलिस अधीक्षक नागौर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना होगा।


