जैसलमेर के सुदासरी गांव स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में एक मादा गोडावण की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मादा गोडावण के सिर पर चोट का निशान है। ब्रीडिंग सेंटर से मादा गोडावण का शव डेजर्ट नेशनल पार्क (डीएनपी) कार्यालय लाया गया, जहां उसका पोस्टमॉर्टम किया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद गोडावण के शव के सैंपल लेकर देहरादून स्थित लैब भिजवाए गए हैं। ताकि मौत का असली कारण सामने आ सके। मृत पक्षी का अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के लिहाज से किया गया। DFO डीएनपी बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि सुदासरी स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में साढ़े पांच साल की मादा गोडावण का शव पिंजरे में मिला है। जब शव को देखा गया तो उसके सिर में चोट का निशान था। शायद उड़ान भरते हुए वो पिंजरे से कहीं टकराई हो या हार्ट अटैक आया हो, इसकी जानकारी पोस्टमॉर्टम के बाद ही सामने आ पाएगी। फिलहाल सैंपल लेकर शव का अंतिम संस्कार किया गया। 2019 में मिला था मादा गोडावण का अंडा DFO बृज मोहन गुप्ता ने बताया कि मादा गोडावण साल 2019 में सुदासरी स्थित गोडावण विचरण क्षेत्र में अंडे के रूप में मिली थी। ब्रीडिंग सेंटर में अंडे कि हेचिंग के बाद वो चूजे के रूप में बाहर आई। अभी वो साढ़े 5 साल कि थी। उसकी मौत के कारणों की जांच की जा रही है। जैसलमेर में 173 गोडावण है DFO गुप्ता ने बताया कि जैसलमेर में गोडावण की संख्या 173 है। जिसमें से 128 गोडावण तो फील्ड में घूम रहे हैं। वहीं 45 गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में हैं। इनमें से एक मादा गोडावण कि मौत हो चुकी है। अब संख्या 44 हो गई है। इससे पहले 16 सितंबर, 2020 को जैसलमेर से करीब 50 किलोमीटर दूर देगराय ओरण में एक मादा गोडावण की हाइटेंशन लाइन से टकराकर मौत हो गई थी। जिसकी याद में पर्यावरण प्रेमियों ने स्मारक भी बनाया है। डेजर्ट नेशनल पार्क गोडावण का सबसे संरक्षित क्षेत्र जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क गोडावण का सबसे संरक्षित इलाका माना जाता है। यहां पर 70 के करीब क्लोजर हैं, जिसके कारण यहां पर गोडावण के प्रजनन की अनुकूल स्थितियां बनी हुई हैं। पार्क में बनाए गए हैचरी सेंटर में अंडों को वैज्ञानिक तरीके से सेज कर उनसे चूजे निकलवाए जा रहे हैं।


