हनुमानगढ़ में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सवर्ण समाज का आक्रोश रविवार को फूट पड़ा। इस दौरान विभिन्न समाज व संगठनों से जुड़े लोगों ने जंक्शन के मुख्य बाजार में जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समरसता के लिए हानिकारक करार दिया। इस प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हुए। ‘जाति के आधार पर आपस में लड़ाने की साजिश’
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नए कानून से शिक्षा संस्थानों में भाईचारे और निष्पक्षता की भावना को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों के जरिए विद्यार्थियों को जाति और वर्ग के आधार पर आपस में लड़ाने की साजिश की जा रही है, जिससे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और समानता का प्रसार होना चाहिए, न कि समाज को विभाजित करना। एक्ट को तुरंत वापस लेने की मांग
मुख्य बाजार में हुए इस प्रदर्शन के दौरान सरकार से एक्ट को तुरंत वापस लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को लागू किया गया तो इससे उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नए नियमों से पैदा होगी अस्थिरता
इस मौके पर डॉ. निशांत बतरा ने कहा कि एक्ट के प्रावधान छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हैं और इन्हें बिना व्यापक चर्चा के लागू करना गलत है। भगवान सिंह खुड़ी और भवानी शंकर शर्मा ने टिप्पणी की कि शिक्षा नीति में किसी भी तरह का भेदभाव समाज को कमजोर करता है। आशीष पारीक ने आरोप लगाया कि नए नियमों से शिक्षा संस्थानों में अनावश्यक विवाद और अस्थिरता पैदा होगी।
प्रदर्शन में ओमप्रकाश अग्रवाल, सचिन कौशिक, गोपाल शर्मा शेरू और महेश शर्मा सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से एक्ट पर पुनर्विचार करने और छात्र हित में निर्णय लेने का आग्रह किया।


