बांसवाड़ा उदयपुर मुख्य मार्ग पर स्थित चिड़ियावासा गांव रविवार को पूरी तरह भगवा रंग में नजर आया। यहां सर्व समाज की भागीदारी से हिंदू सम्मेलन हुआ, जिसमें आसपास के कई गांवों से हजारों लोग पहुंचे। कागदी नदी से गंगाजल भरकर कलश 5100 महिलाओं ने यात्रा निकाली गई, इसके बाद धर्मसभा और महाप्रसाद हुआ, इसमें प्रसाद के लिए 11 क्विंटल शक्कर से बनाई बूंदी। मुख्य मार्ग पर दिखी भीड और भागीदारी
चिड़ियावासा गांव बांसवाड़ा उदयपुर मुख्य मार्ग पर स्थित है। रविवार को यहां माहौल बदला हुआ नजर आया। एक महीने से चल रही तैयारियों के बाद आसपास के एक दर्जन से ज्यादा गांवों के ग्रामीण यहां पहुंचे। गांव के हर हिस्से में लोगों की आवाजाही रही और पूरे दिन गतिविधियां चलती रहीं। 5100 महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण गंगाजल कलश यात्रा रही। करीब 5100 महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल हुईं। ढोल नगाडों के साथ यात्रा गांव के मुख्य रास्तों से होते हुए कागदी नदी तक पहुंची। वहां पूजा के बाद कलशों में जल भरा गया। इसके बाद उदयपुर मुख्य मार्ग सहित गांव में करीब 1 किलोमीटर पैदल यात्रा निकाली गई। धर्मसभा में रखी गई एकजुटता की बात
कलश यात्रा के बाद गांव में धर्मसभा हुई। वक्ताओं ने समाज में आपसी तालमेल और धर्म से जुडे विषयों पर बात रखी। ग्रामीणों की मौजूदगी लगातार बनी रही और पूरे समय अनुशासन नजर आया। 11 क्विंटल बूंदी का महाप्रसाद
कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद दिया गया। इसके लिए करीब 11 क्विंटल शक्कर की बूंदी तैयार की गई। इसके साथ सर्व समाज का स्नेहभोज भी हुआ। हजारों लोगों ने पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की। 30 दिन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था
इस पूरे कार्यक्रम के लिए चिड़ियावासा और आसपास के गांवों के लोग पिछले 30 दिन से तैयारी में जुटे थे। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। वहीं स्वयंसेवकों ने यातायात और भोजन व्यवस्था संभाली।


