अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे 104 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का एक युवक भी शामिल है। पंजाब में लैंड होने के बाद से दिल्ली पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है। जल्द ही उसे यूपी पुलिस के हवाले किया जाएगा। डिपोर्ट किए गए युवक की पहचान गुरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। जो पीलीभीत के पूरनपुर कस्बे के पास स्थित बंजरिया गांव का निवासी है। उसकी मां जसविंदर कौर के अनुसार, गुरप्रीत करीब दो साल पहले इंग्लैंड गया था। वहीं रह रहा था। लगभग 22 दिन पहले उसने अपने परिवार को सूचित किया था। वह डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका पहुंच गया है। इसके बाद से ही परिवार का उससे संपर्क टूट गया था। गुरप्रीत अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा है। उसका बड़ा भाई गुरदेव सिंह उर्फ गुरजीत भारतीय सेना में सेवारत है। डिपोर्टेशन की खबर मिलने के बाद से परिवार के सदस्य गुरप्रीत से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह मामला अवैध प्रवास की समस्या को उजागर करता है। जिसमें युवा बेहतर जीवन की तलाश में गैरकानूनी तरीकों का सहारा लेते हैं। दो महीने की फीस जमा नहीं की गांव बंजरिया निवासी गुरप्रीत सिंह ने बताया कि स्टडी वीजा पर सितंबर 2022 में 15 लाख रुपए खर्च कर नगर में आईलेट सेंटर चलाने वाले संचालक के माध्यम से इंग्लैंड गया था। इंग्लैंड में स्टडी वीजा पर विदेश भेजने वाले से छह महीने की फीस जमा करना तय हुआ था। लेकिन उसने दो महीने की फीस नहीं जमा की। इस वजह से इंग्लैंड में उसे स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद मजदूरी कर इंग्लैंड में रहता रहा। इस दौरान वीजा की अवधि समाप्त हो गई। इसके बाद भी रिस्क पर इंग्लैंड में रहता रहा। स्पेन का टूरिज्म वीजा दिलाया उसने इंग्लैंड से कनाडा, आस्ट्रेलिया के वर्क वीजा की कोशिश की। इंग्लैंड में भारत के रहने वाले एक व्यक्ति से उसकी मुलाकात हुई। उसने डंकी रूट से उसे अमेरिका तक पहुंचाने का वादा किया। इसके लिए उसके भाई ने कर्ज लेकर 22 लाख रुपए का इंतजाम कराया। डंकी रूट से अमेरिका भिजवाने वाले ने दिसंबर 2024 को उसे स्पेन का टूरिज्म वीजा दिलाया। अमेरिका सीमा में घुसते ही सेना ने पकड़ा
स्पेन से मैक्सिको होते हुए उसे कई किलोमीटर बीहड़, सुनसान, जंगल के रास्तों से कई किलोमीटर पैदल चलाया गया। डंकी रूट से अमेरिका भेजने वालों ने उसका मोबाइल बंदूक के बल पर छीनकर फोड़ दिया। 13 जनवरी 25 को अमेरिका सीमा में पहुंचा दिया गया। अमेरिका सीमा में घुसते ही उसे वहां की सेना ने पकड़ लिया। 22 दिन तक अमेरिका में डिटेंशन कैंप में रखा गया। इसके बाद गलत ढंग से अमेरिका में घुसे भारत के लोगों की सूची के अनुसार सभी को हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाकर जहाज से गोवान और वहां से अमृतसर हवाई जहाज से लाया गया। गुरप्रीत ने बताया कि इस दौरान उसे खाने को तो दिया गया। लेकिन 22 दिन नहाने तक नहीं दिया गया। अमेरिकी सैनिकों का व्यवहार अच्छा, डर के चलते लगाई थीं बेड़ियां
गुरप्रीत सिंह ने बताया पकड़े जाने के बाद अमेरिकी सैनिकों का हरियाणा को छोड़कर अन्य लोगों के प्रति व्यवहार ठीक था। हरियाणा के लोगों की बोली को लेकर सैनिक उनको असभ्य बता रहे थे। बताया कि हाथों और पैरों में हथकड़ी इस वजह से लगाई गई। सैनिकों की संख्या कम थी। पकड़े गए लोग कहीं उन पर हमला न कर दें। बेटे से मिलने को आतुर थी मां
गुरप्रीत ने 22 दिन पहले अपने सेना में तैनात भाई को फोन कर अमेरिका पहुंचने की जानकारी दी थी। इसके बाद उसका संपर्क परिजन से नहीं हो रहा था। पुत्र से बात न होने पर उसकी मां जसविंदर कौर परेशान थीं। बुधवार को जब उसके अमेरिका में पकड़े जाने और उसे भारत वापस लाने की जानकारी हुई। तब से जसविंदर कौर दुखी थीं। गुरुवार को गुरप्रीत के घर लौटने की जानकारी पर उसके घर रिश्तेदारों, करीबियों की भीड़ लगी।
बेहद मायूस नजर आए पिता-पुत्र
15 लाख रुपए खर्च कर इंग्लैंड और 22 लाख रुपए खर्च कर अमेरिका डंकी रूट से पहुंचा गुरप्रीत वापस खाली हाथ भारत लौटने पर मायूस दिखा। पिता गुरमीत भी मायूस और दुखी थे। गुरप्रीत से पुलिस ने करीब ढाई घंटे से अधिक पूछताछ के बाद उसके पिता को सौंप दिया।


