कांगड़ा में त्रियुंड ट्रैक का होगा कायाकल्प:वन विभाग बनाएगा टेंट जोन, पर्यटकों को मिलेगी पानी और टॉयलेट की सुविधा

हिमाचल प्रदेश के धौलाधार क्षेत्र में स्थित लोकप्रिय त्रियुंड ट्रैक का कायाकल्प किया जाएगा। वन विभाग ने पर्यटकों की बढ़ती संख्या और पर्यावरण पर इसके प्रभाव को देखते हुए ट्रैक को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य ट्रेकर्स को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना और पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखना है। केवल तय स्थानों पर होगी कैंपिंग की अनुमति इस विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के तहत त्रियुंड को अंतरराष्ट्रीय ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रमुख बदलावों में निर्धारित टेंट जोन बनाना शामिल है, जिससे अब केवल तय स्थानों पर ही कैंपिंग की अनुमति होगी। ट्रेक रूट और शीर्ष पर शौचालय बनाए जाएंगे। कचरा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। रेस्ट प्वाइंट भी स्थापित किए जाएंगे फिसलन भरे और जोखिमपूर्ण रास्तों की मरम्मत की जाएगी और चढ़ाई के दौरान आराम करने के लिए रणनीतिक स्थानों पर रेस्ट प्वाइंट भी स्थापित किए जाएंगे। त्रियुंड में पानी की कमी एक बड़ी समस्या रही है, क्योंकि वहां कोई स्थायी पेयजल लाइन नहीं है। वन विभाग अब पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाए बिना पानी की आपूर्ति के विकल्पों पर काम कर रहा है, ताकि पर्यटकों को पानी के लिए परेशानी न हो। जीपीएस आधारित सर्वेक्षण जारी डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) अमित शर्मा ने बताया कि त्रियुंड अब एक अंतरराष्ट्रीय गंतव्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना आवश्यक है। शर्मा ने बताया कि जीपीएस आधारित सर्वेक्षण जारी है, जिसे पूरा होने के बाद जल्द ही मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक वहीं समुद्र तल से 2,875 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड, भागसूनाग से लगभग 9 किलोमीटर दूर है और चढ़ाई में 4-5 घंटे लगते हैं। मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच यहां हजारों देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे यह शुरुआती स्तर के ट्रेकर्स के लिए सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *