नए यूजीसी बिल के विरोध में रविवार को अंबिकापुर में सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। सवर्ण समाज के द्वारा रविवार को नगर बंद का आह्वान किया गया था। सवर्ण समाज के आह्वान पर दोपहर बाद तक नगर के मुख्यमार्गों की अधिकांश दुकानें बंद रही। यूजीसी बिल को “काला कानून” बताते हुए सवर्ण समाज ने रैली निकाली और कलेक्टोरेट चौक पर सभा का आयोजन किया। यूजीसी बिल के विरोध में राम मंदिर परिसर से रैली निकाली गई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई घड़ी चौक पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग शामिल हुए। रैली में हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यूजीसी बिल के प्रावधानों का विरोध
रैली के घड़ी चौक पहुंचने के बाद वहां एक जनसभा का आयोजन किया गया, जहां समाज के पदाधिकारियों और वक्ताओं ने यूजीसी बिल के विभिन्न प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया। वक्ताओं का कहना था कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला है और समाज को बांटने की साजिश का हिस्सा है। जनसभा को संबोधित करते हुए ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष राजेश तिवारी ने कहा कि यूजीसी कानून के माध्यम से एसटी, एससी और ओबीसी समाज को स्वर्ण समाज से अलग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां इन वर्गों को बरगलाकर समाज में विभाजन पैदा करना चाहती हैं। वक्ताओं ने कहा कि, “अंग्रेजों ने जिस तरह ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई थी, आज भी वैसी ही नीति अपनाई जा रही है। यूजीसी कानून एक काला कानून है और सवर्ण समाज इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा।” प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के लोगों ने शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराकर अपने आंदोलन को मजबूत समर्थन दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। बिल को वापस नहीं लेने पर सवर्ण समाज ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।


