जयपुर में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा- सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि महासती के दर्शन से उन्हें अंत्योदय और सेवा की प्रेरणा मिलती है। उनका संबोधन सेवा, संवेदना और परिवर्तन के संकल्प से परिपूर्ण रहा। विदुषी डॉ. कुमुदलता के 10 वर्ष बाद जयपुर आगमन पर रविवार को आध्यात्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धा सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा सहित वरिष्ठ आईएएस-आईपीएस, उद्योग जगत एवं कला जगत की हस्तियों ने हिस्सा लिया। कुलदीप रांका बोले- नीति और नियत की शुद्धता ही सबसे बड़ा अनुष्ठान
मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कुलदीप रांका ने कहा- प्रशासनिक दायित्वों की आपाधापी के बीच संतों का सान्निध्य जीवन को नई दिशा देता है। उन्होंने महासती की तपस्या और अनुशासन को समाज के लिए प्रकाश स्तंभ बताते हुए कहा कि नीति और नियत की शुद्धता ही सबसे बड़ा अनुष्ठान है। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम में उपस्थित एडीजी वी.के. सिंह ने कहा- गुरु मां के सान्निध्य से उनके जीवन में शांति और कोमलता का संचार हुआ है। उन्होंने बताया कि अब उनके दिन की शुरुआत ‘जय जिनेंद्र’ के मंत्रोच्चार से होती है। इससे उन्हें आत्मिक ऊर्जा मिलती है। गुरु मां की प्रेरणा से अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाया
कार्यक्रम में उद्योग और फिल्म जगत की हस्तियों ने भी महासती के प्रभाव को रेखांकित किया। रेमंड्स ग्रुप के सीईओ शांतिलाल पोखरना ने बताया- गुरु मां की प्रेरणा से गौतम सिंघानिया ने अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाया है। फिल्म निर्माता के.सी. बोकाड़िया ने कहा कि उनकी फिल्मों में अब मांसाहार का चित्रण नहीं किया जाता, जो साध्वी के प्रति उनकी श्रद्धा का परिणाम है। पूर्व लोकायुक्त एस.एस. कोठारी ने न्याय और अध्यात्म के संबंधों पर प्रकाश डाला। मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संचार करते
डॉ. कुमुदलता ने कहा- मंत्र केवल ध्वनि नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संचार करते हैं। उन्होंने 10 वर्ष बाद जयपुरवासियों को साधना, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश दिया। कार्यक्रम में मंच संचालन प्रवास समिति के संयोजक प्रदीप गुगलिया ने किया। समापन अवसर पर हुकमचंद जामड़, अनिल चतर, मानक तालेड़ा और अशोक श्रीश्रीमाल ने अतिथियों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताया।


