भास्कर न्यूज | जांजगीर नगरीय निकाय चुनाव के साथ ही साथ अब पंचायतों में भी चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी वादों की झड़ी लगने के बाद अब प्रत्याशी प्रचार में और भी ज्यादा जोर देने लगे हैं। जिला पंचायत चुनाव में इस बार निर्दलीय और बागी कांग्रेस और भाजपा के लिए मुसीबत बन सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेता बतौर निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। बागियों के नामांकन के साथ चुनाव जंग और रोचक हो गई। कई नेता खुद मैदान में है तो कई ने पत्नियों के के पर्चे जमा कराए है। जांजगीर-चाम्पा जिला पंचायत 17 क्षेत्रों 97 उम्मीदवार मैदान हैं, इनके बीच कड़ा मुकाबला होगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन चरणों में होगी। नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 6 फरवरी को प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न का आबंटन भी कर दिया गया है। क्षेत्र क्रमांक 1 के लिए 17 प्रत्याशियों ने नामांकन जमा किया था, मगर इनमें से केवल 4 उम्मीदवार खगेंद्र साहू, आशुतोष कुमार साहू, बिंदा देवी दिनकर, पंचराम बरेठ ने नामांकन वापस लिया है, अब यहां 11 उम्मीदवार मैदान में है। इसी तरह क्षेत्र क्रमांक 2 के लिए 7 में से 2 उम्मीदवार उमाबाई कश्यप, कुसुम साव, क्षेत्र क्रमांक 6 के लिए 7 में से 1 उम्मीदवार पूजा भारद्वाज, क्षेत्र 7 के लिए 6 में से 1 उम्मीदवार पुष्पादेवी प्रधान, क्षेत्र क्रमांक 8 के लिए 6 में से 1 गायत्री लहरे, क्षेत्र क्रमांक 9 के लिए 5 में से 1 उम्मीदवार बुधवार सिंह सिदार, क्षेत्र 10 के लिए 5 में से 1 जानकीदेवी बंजारे, क्षेत्र 16 के लिए 7 मंे से 1 उम्मीदवार यशोधरा देवी कर्ष और क्षेत्र क्रमांक 17 के लिए 8 में से 1 सुनंद्रा चंद्रा ने नामांकन वापस लिया है। त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर भीतरघात के भी मिल रहे संकेत त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस में दावेदारों की लंबी लिस्ट थी। भाजपा में कुछ पुराने नेता नए प्रत्याशियों को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस में भी कुछ नेताओं के बीच खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं। इन चुनावों के बीच भीतरघात की आशंका भी जताई जा रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में कुछ ऐसे नेता हैं जो पार्टी के अधिक प्रभावशाली नेताओं से नाराज हैं और उनके मन में भीतरघात के विचार पनप रहे हैं। इन आशंकाओं के बावजूद दोनों दलों के शीर्ष नेता पूरी कोशिश कर रहे हैं कि पार्टी में कोई विभाजन न हो और चुनावी तैयारी में कोई कमी न आए।


