राजधानी में डॉ. जाकिर हुसैन के नाम पर बना एकमात्र पार्क अब पूरी तरह बदहाल

देश के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की 128वीं जयंती आज है। 8 फरवरी 1897 को उनका जन्म हुआ था। उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाई। आजादी के बाद देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। उनकी याद में ​संयुक्त बिहार में वर्ष 1969 में रांची में राजभवन के समक्ष डॉ. जाकिर हुसैन पार्क बनाया गया। लेकिन, आज यह पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पार्क में लगे झूले खराब हो चुके हैं। गेट में जंग लग रहा है। पेड़-पौधे सूखे गए हैं। पार्क के अंदर जहां-तहां गंदगी का अंबार है। खराब ट्रैफिक लाइट, तार व अन्य कबाड़ रखे हुए हैं। शाम में रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से पूरी तरह अंधेरा पसर जाता है। पार्क में लगे झूले टूटे, गेट पर लगता है ऑटो व ई-रिक्शा यहां लगे झूले, मिनी रेल, वाटर फाउंटेन, चेयर पूरी तरह खराब हो गए हैं। पार्क में लगे पौधे सूखने लगे हैं। पार्क के मेन गेट के सामने दिन भर ऑटो और ई-रिक्शा लगा रहता है। इससे आम लोगों को आने-जाने में भी परेशानी होती है। 2021 में जीणोद्धार, 2023 से पार्क फिर से खोने लगा रंगत नगर निगम ने अक्टूबर 2021 में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 75 घंटे के अंदर पार्क का जीर्णोद्धार कर आम लोगों के लिए खोला था। 2023 से देख-रेख के अभाव में पार्क अपनी रंगत खोने लगा। आज पूरी तरह बदहाल हो गया है। कौन हैं डॉ. जाकिर हुसैन 8 फरवरी 1897 में जन्मे डॉ. जाकिर हुसैन हैदराबाद से कानून की पढ़ाई के दौरान ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ गए थे। बाद में पीएचडी करने के लिए जर्मनी चले गए। वहां से डॉक्टरेट की उपाधि लेकर भारत लौटे। वे जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति रहे, विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष, भारतीय प्रेस आयोग, यूनेस्को, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सेवा, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा सेवा में रहते महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य भी किए। 1948 में राज्यसभा सदस्य, 1962 में उपराष्ट्रपति और 1967 में भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने। पार्क में लगे झूले भी देखरेख के अभाव में टूटने लगे हैं। डॉ. जाकिर हुसैन पार्क के अंदर रखा तार, लोहे की जाली व अन्य सामान का कबाड़।

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