गोड्डा में बन रहा झारखंड का दूसरा सबसे बड़ा ओपन तितली पार्क, 120 से अधिक प्रजातियों की तितलियां होंगी, अभी 50 प्रजाति मौजूद

गोड्डा में रांची बिरसा उद्यान के बाद दूसरा सबसे बड़ा ओपन तितली पार्क बन रहा है। यहां 120 से अधिक प्रजातियों की रंग-बिरंगी तितलियां देखने को मिलेंगी।
वन विभाग के सर्वे के अनुसार गोड्डा में ब्लू पैंसी, सह्याद्री बर्डविंग, मालाबार बैंडेड मोर, ब्लू मॉर्मन, ब्लू ड्यूक, तमिल योमन और कॉमन बर्डविंग जैसी 50 प्रजातियों की तितलियां हैं। करीब दो करोड़ रुपए से बनने वाले इस पार्क से शैक्षणिक उद्देश्य भी पूरा होगा। यहां तितलियों के जीवन चक्र, उनके महत्व और पर्यावरण की जानकारी दी जाएगी। तितली पार्क प्रकृति प्रेमियों और छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। इससे पहले रांची के भगवान बिरसा जैविक उद्यान में ओपन तितली पार्क बनाया गया था। 20 एकड़ भूमि पर विकसित इस पार्क में ट्वनी कोस्टर, सार्जेंट, बुश ब्राउन, बैरोनेट, प्लेन टाइगर, लेमन पैंसी, कॉमन सेलर जैसी करीब 100 प्रजाति की तितलियां हैं। गोड्डा के जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी पवन बाघ ने बताया कि पार्क में तितलियों के भोजन के लिए होस्ट व नेक्टर प्लांट लगाए जाएंगे। तितलियों के प्रजनन के लिए नर्सरी विकसित की जाएगी। पार्क में फॉरेस्ट लाइब्रेरी और कैफेटेरिया भी बनेंगे। देश के तितली विशेषज्ञ डॉ. आर्जन बसु की देखरेख में बन रहा पार्क देश के प्रसिद्ध तितली विशेषज्ञ डॉ. अर्जन बसु की देखरेख में पार्क का निर्माण किया जा रहा है। कोलकाता ईको पार्क की तर्ज पर तितलियों को आकर्षित करने वाले पौधे और फूल लगाए जा रहे हैं। तितलियों के विकास के लिए तालाब का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इससे तितलियों की वृद्धि में मदद मिलेगी। पार्क में एक लैब भी बनाई जा रही है, जो बच्चों और छात्रों के लिए अध्ययन में सहायक होगी। पार्क में नेचर इंटरप्रेटेशन सेंटर (एनआईसी) का निर्माण किया गया है। यहां प्रवेश करते ही लोगों को तितलियों की दुनिया में होने का अहसास होगा। एलईडी और साउंड इफेक्ट्स से बड़ी-बड़ी तितलियों को देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। जानिए…कैसा होता है ओपन तितली पार्क ओपन तितली पार्क में तितलियों को प्राकृतिक वातावरण में उड़ने और प्रजनन करने के लिए अनुकूल माहौल दिया जाता है। यहां ऐसे फूल और पौधे लगाए जाते हैं, जो तितलियों को आकर्षित करते हैं और भोजन उपलब्ध कराते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य तितलियों के संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को इनके महत्व के बारे में जागरूक करना है।

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