जल संसाधन मंत्रालय की कॉन्फ्रेंस 18 व 19 को:देशभर के मंत्री-अधिकारी 2 दिन तक जुटेंगे, हमसे सीखेंगे जल का प्रबंधन

लेकसिटी झीलों के लिए मशहूर है, साथ ही इस शहर का वाटर चैनल (झीलों का आपस में जुड़ाव), जल प्रबंधन और संचय का तरीका दुनियाभर में मशहूर है। इसी का नतीजा समझ लीजिए कि इनके बारे में जानने के लिए पूरे देश के जल संसाधन मंत्री और इस विभाग के प्रमुख शासन सचिव स्तर के अधिकारी सहित 300 से ज्यादा प्रतिनिधि उदयपुर में जुटेंगे। ये 18 व 19 फरवरी को दो दिन तक यहां रहेंगे और इन तकनीकों को जानेंगे। इसके अलावा न्यूनतम स्रोतों से पानी के अधिकतम उपयाेग, संरक्षण, नदियाें काे जाेड़ने, जल स्वावलंबन आदि विषयाें पर भी चर्चा हाेगी। इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की ओर से ऑल इंडिया स्टेट मिनिस्टर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। यह 2047 के वाटर विजन को लेकर होगी। आयोजन कोड़ियात स्थित अनंता होटल में हाेगा। लेकसिटी में करीब डेढ़ माह में राष्ट्रीय स्तर के दूसरे बड़े आयोजन की तैयारी है। गत 10 से 12 जनवरी तक यहां केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशाला हुई थी। इसमें केंद्र और 20 राज्याें के महिला बाल विकास मंत्री और प्रतिनिधि आए थे। इन्होंने महिलाओ और बच्चाें के समग्र विकास-कल्याण से जुड़ी चुनाैतियाें और समाधान पर मंथन के साथ नवाचार साझा किए थे। सदियों पहले ऐसी तकनीक कि एक बूंद व्यर्थ नहीं उदयपुर (मेवाड़) के शासकों ने सदियों पहले ऐसी इंजीनियरिंग कराई कि एक बूंद पानी व्यर्थ नहीं जाता। यहां गिर्वा की पहाड़ियों का बरसाती पानी बांधों को भरने के बाद सीसारमा नदी के रास्ते पिछोला झील में जाता है। यह भरती है तो फतहसागर झील फुल होती है। इसके बाद उदयसागर, सरजणा (वल्लभनगर), बड़गांव (मावली) होते हुए चित्तौड़ तक पानी पहुंचता है। बरसात अच्छी होने पर यह पानी जयपुर की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध को भरने में भी योगदान देता है। कोटड़ा-झाड़ोल क्षेत्र की नदियां उफनने पर गुजरात तक पानी जाता है। शहर की झीलें शहरी जलापूर्ति के साथ पर्यटन का भी आधार हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल भी शामिल होंगे कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और प्रदेश के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के साथ हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशाें के मंत्री-प्रतिनिधि आएंगे। ये सभी झीलाें का जायजा भी लेंगे। झीलाें का वाटर मैनेजमेंट समझेंगे। कार्यशाला में मंत्रालय उदयपुर के प्रबंधन के बारे में सभी को जानकारी देगा। उदयपुर से पहले जनवरी 2023 में भाेपाल (मध्यप्रदेश) और इसके बाद तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ऐसी बैठक हो चुकी है। इनमें जल संचय के विषयाें पर किए गए निर्णयाें की समीक्षा भी उदयपुर कॉन्फ्रेंस में की जाएगी।

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