विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ इस बार ऐतिहासिक रहा। मालवा प्रांत के 15 जिलों से आईं 1400 से अधिक महिलाओं ने महाकाल मंदिर परिसर में एक साथ शिव पंचाक्षर स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया।
यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं ने यह पाठ एक साथ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैयाजी जोशी ने किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि “सेवा और संस्कार मातृशक्ति के स्वभाव में होते हैं, यह ईश्वर की देन है।
“विशेष अतिथि डॉ. मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि मां शक्ति भी है, ममता भी और वही समाज में संवेदनशीलता ला सकती है।समागम में भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भवन और भ्रमण पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसका उद्घाटन सभी अतिथियों द्वारा किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के तहत खंडवा, बड़वानी और उज्जैन की टीमों ने गणगौर, भगोरिया और शौर्य दल की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर सप्तमातृका सम्मान भी प्रदान किए गए।
समाज सेवा, ज्ञान, कला, धर्म, शौर्य और मातृत्व जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सात महिलाओं को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वाली महिलाओं में ज्ञान के लिए डॉ. अनीता तोमर, उद्यम के लिए हेमलता ताम्हणे, सेवा के लिए भाग्यश्री खड़खड़िया, धर्म के लिए हेमलता सरकार, मातृत्व के लिए रजनी कावड़िया, कला के लिए पद्मश्री शांति परमार और शौर्य के लिए दीपमाला नलवाया शामिल थीं। कार्यक्रम के समापन के बाद झालरिया मठ से महाकाल मंदिर तक एक शोभायात्रा निकाली गई। महाकाल मंदिर पहुंचकर सभी महिलाओं ने महाकाल के आंगन में एक बार फिर शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ किया। यह दृश्य श्रद्धा और शक्ति का अद्भुत संगम बन गया। देखिए तस्वीरें…


