श्रीमद् भागवत अमृत रूपी कलश है, इसका रसपान करें

भास्कर न्यूज | बारगांव ग्राम बारगांव में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के पांचवें दिन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। वृंदावन से दीक्षा प्राप्त कथावाचक श्रद्धा ने कहा कि श्रीमद्भागवत अमृत रूपी कलश है, जिसके रसपान से मानव जीवन कृतार्थ हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को भागवत कथा का श्रवण कर अपने जीवन को धर्म, भक्ति और सद्गुणों से परिपूर्ण करना चाहिए। पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंच को फूलों की मालाओं, रंग-बिरंगे गुब्बारों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और बड़ी संख्या में भक्त कथा स्थल पर उपस्थित रहे। भजनों और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के दौरान साध्वी श्रद्धा ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की भावपूर्ण व्याख्या की। उन्होंने बताया कि बाल गोपाल का जन्म देवकी और वासुदेव के आठवें संतान के रूप में हुआ। देवकी और वासुदेव के अर्थ को समझाते हुए उन्होंने कहा कि देवकी का अर्थ है, जो देवत्व के भाव के साथ जीवन जीती है, जबकि वासुदेव का अर्थ है, जिसमें देव तत्व का वास हो। ऐसे व्यक्ति को ईश्वर की प्राप्ति के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि भगवान स्वयं उसकी विपरीत परिस्थितियों की बेड़ियों को काटकर उसे संसार सागर से मुक्त कर देते हैं। मनुष्य के जीवन में छह बड़े शत्रु हैं उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में छह शत्रु होते हैं, काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और अहंकार। जब ये छह शत्रु समाप्त हो जाते हैं, तब सातवें संतान के रूप में शेषनाग, जो काल के प्रतीक हैं, उस व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं कर पाते। भगवान अपनी योगमाया से काल का मार्ग बदल देते हैं और तभी आठवें संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार होता है। जिस जीवन में श्रीकृष्ण भक्ति का प्रवेश हो जाता है, वही जीवन वास्तव में सफल और सार्थक माना जाता है। कथा के बीच भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। मुख्य यजमान ओमप्रकाश वर्मा एवं हेमलता वर्मा ने विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की।

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